प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा बेटे सहित अकाली दल में लौटे, सुखबीर बादल ने कराई वापसी

प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा बेटे सहित शिरोमणि अकाली दल में लौटे, सुखबीर बादल ने कराई वापसी; बोले- विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा

शिरोमणि अकाली दल (पुनर्सृजित) छोड़ने के बाद वरिष्ठ अकाली नेता और पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा अपने बेटे हरिंदर पाल सिंह चंदूमाजरा के साथ दोबारा शिरोमणि अकाली दल (बादल) में शामिल हो गए हैं। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने चंदूमाजरा के आवास पर पहुंचकर उन्हें और उनके बेटे को पार्टी में शामिल करवाया।

पार्टी में वापसी के बाद प्रो. चंदूमाजरा ने स्पष्ट किया कि वह आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके अनुसार, चुनाव में उनके बेटे हरिंदर पाल सिंह चंदूमाजरा उम्मीदवार होंगे। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि उनका बेटा सनौर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेगा।

बोले- पंजाब के हितों के लिए अकाली दल का एकजुट होना जरूरी

प्रो. चंदूमाजरा ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक हालात और पंजाब की परिस्थितियों को देखते हुए अकाली दल के अलग-अलग धड़ों का एकजुट होना जरूरी है।

उन्होंने 2 दिसंबर के हुकमनामे का जिक्र करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य अकाली दल को तोड़ना नहीं, बल्कि जोड़ना था।

चंदूमाजरा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एनडीए सरकार से जुड़े बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही पंजाब को बचाने के लिए अकाली दलों की एकजुटता की जरूरत पर अपनी राय रखी थी।

उन्होंने बताया कि इस बयान पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने नाराजगी जताई थी। जब उनसे पूछा गया कि अब ज्ञानी हरप्रीत सिंह क्या करेंगे, तो उन्होंने कहा कि वह कथा कर सकते हैं।

2024 लोकसभा चुनाव के बाद शुरू हुई थी बगावत

अकाली दल में अंदरूनी विवाद की शुरुआत 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद हुई थी। चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और उसे केवल एक सीट मिली थी।

इसके बाद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व पर सवाल उठाए। इन नेताओं ने अलग बागी गुट बनाकर सुखबीर बादल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।

पार्टी से निष्कासन के बाद बना था अकाली दल पुनर्सृजित

बागी नेताओं के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने कार्रवाई करते हुए प्रो. चंदूमाजरा और उनके कई साथियों को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद इन नेताओं ने अलग होकर शिरोमणि अकाली दल (पुनर्सृजित) नाम से नया धड़ा बनाया।

इस धड़े की कमान पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को सौंपी गई थी। प्रो. चंदूमाजरा भी इसमें शामिल हो गए थे। उनका कहना था कि यह संगठन अकाली दल के मूल सिद्धांतों पर काम करेगा।

4 नवंबर को दिया इस्तीफा, बेटे ने भी छोड़ा था संगठन

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल पुनर्सृजित में भी मतभेद सामने आने लगे। इसके बाद 4 नवंबर 2026 को प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने संगठन से इस्तीफा दे दिया।

अगले दिन 5 नवंबर को उनके बेटे और पूर्व विधायक हरिंदर पाल सिंह चंदूमाजरा ने भी अपने समर्थकों के साथ इस धड़े को छोड़ दिया। अब दोनों की शिरोमणि अकाली दल (बादल) में वापसी हो गई है।

चंदूमाजरा बोले- बेटा सनौर से लड़ेगा चुनाव

पार्टी में वापसी के दौरान प्रो. चंदूमाजरा ने साफ कहा कि वह खुद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और उनके बेटे चुनावी मैदान में उतरेंगे। उन्होंने बेटे के लिए सनौर विधानसभा सीट का ऐलान किया है।

इस वापसी के साथ पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल के राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

 

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