अटारी बॉर्डर पर पाकिस्तान ने पालकी साहिब को लौटाया, 7 घंटे इंतजार के बाद नहीं मिली मंजूरी

भारत से पाकिस्तान ले जाई जा रही पालकी साहिब लौटाई गई, अटारी बॉर्डर पर 7 घंटे इंतजार के बाद नहीं मिली मंजूरी

भारत से पाकिस्तान के जैकोबाबाद स्थित गुरुद्वारे में भेजी जा रही पालकी साहिब को पाकिस्तानी अधिकारियों ने सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी। अमृतसर के अटारी-वाघा बॉर्डर पर करीब 7 घंटे इंतजार के बाद पालकी साहिब को लेकर आया ट्रक वापस भारत लौट गया।

खास बात यह है कि पालकी साहिब को पाकिस्तान ले जाने की कोशिश करने वाले 49 सिख श्रद्धालु भी पाकिस्तान के ही रहने वाले थे। वे करीब एक महीने की धार्मिक यात्रा पूरी करने के बाद शनिवार को अपने वतन लौट रहे थे। भारत सरकार ने हवाई यात्रा में आ रही परेशानियों को देखते हुए इन श्रद्धालुओं को सड़क मार्ग से पाकिस्तान जाने की अनुमति दी थी।

30 दिन की धार्मिक यात्रा पर भारत आए थे 49 श्रद्धालु

पाकिस्तान के ननकाना साहिब और आसपास के इलाकों में रहने वाले 49 सिख श्रद्धालु 30 दिन के वीजा पर भारत आए थे। इस दौरान उन्होंने श्री हेमकुंट साहिब, श्री आनंदपुर साहिब, सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब और दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारों में माथा टेका।

धार्मिक यात्रा पूरी होने के बाद सभी श्रद्धालुओं को पाकिस्तान लौटना था। इसी दौरान वे अपने साथ पालकी साहिब भी पाकिस्तान ले जाना चाहते थे, जिसे जैकोबाबाद के एक गुरुद्वारे में स्थापित किया जाना था।

हवाई यात्रा में लग रहे थे 22 से 24 घंटे

श्रद्धालुओं की वापसी पहले हवाई मार्ग से होनी थी, लेकिन कनेक्टिंग फ्लाइट और जरूरी कागजी प्रक्रिया के कारण इस सफर में करीब 22 से 24 घंटे लग रहे थे।

श्रद्धालुओं की परेशानी को देखते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने केंद्र सरकार से सड़क मार्ग से पाकिस्तान लौटने की अनुमति मांगी थी।

केंद्र सरकार ने अटारी बॉर्डर से वापसी की दी मंजूरी

श्रद्धालुओं की समस्या और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान जाने की अनुमति दे दी। इसके बाद सभी 49 श्रद्धालु सड़क मार्ग से अपने देश के लिए रवाना हुए।

इसी दौरान पालकी साहिब को भी ट्रक के जरिए अटारी-वाघा अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पहुंचाया गया। इसे पाकिस्तान के जैकोबाबाद स्थित गुरुद्वारे में ले जाने की योजना थी। बताया गया कि भारतीय पक्ष की ओर से सीमा पार भेजने के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं।

पाकिस्तानी कस्टम ने अनुमति के लिए मांगा समय

सीमा पर पहुंचने के बाद पाकिस्तानी कस्टम अधिकारियों ने पालकी साहिब को अपने देश में ले जाने के लिए जरूरी मंजूरी लेने का हवाला दिया। अधिकारियों ने इसके लिए समय मांगा।

इस दौरान ट्रक के साथ आए लोगों को करीब 6 से 7 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। उन्हें उम्मीद थी कि अनुमति मिलने के बाद पालकी साहिब को पाकिस्तान भेज दिया जाएगा।

मंजूरी नहीं मिली तो भारत लौट आया ट्रक

काफी इंतजार के बावजूद पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से पालकी साहिब को सीमा पार ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद ट्रक को पालकी साहिब समेत वापस भारत लौटना पड़ा।

हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने मंजूरी नहीं देने का स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किया है।

दोनों देशों की सरकारों से धार्मिक यात्राएं आसान करने की अपील

पाकिस्तान लौट रहे श्रद्धालु भूपिंदर सिंह ने बताया कि 30 दिनों की धार्मिक यात्रा के दौरान श्री हेमकुंट साहिब और श्री हरिमंदिर साहिब के दर्शन उनके लिए यादगार रहे। उन्होंने यात्रा के इंतजामों के लिए भारत सरकार, पाकिस्तान सरकार और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का धन्यवाद किया।

श्रद्धालुओं ने दोनों देशों की सरकारों से धार्मिक यात्राओं के लिए आवाजाही आसान बनाने की अपील की। उनका कहना था कि जिस तरह करतारपुर साहिब कॉरिडोर के माध्यम से भारतीय श्रद्धालुओं को पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारे के दर्शन की सुविधा मिलती है, उसी तरह पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं को भी भारत के ऐतिहासिक गुरुद्वारों तक पहुंचने की बेहतर सुविधा मिलनी चाहिए।

 

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