परविंदर झोटा के अंतिम संस्कार से पहले पिता की तबीयत बिगड़ी, SSP के तबादले की मांग पर अड़े; कल से भूख हड़ताल
मानसा में मारे गए नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के अंतिम संस्कार से पहले उनके पिता भीम सिंह की तबीयत बिगड़ गई। मौके पर डॉक्टरों ने उनकी जांच की। परिवार और समर्थकों ने पंजाब सरकार से मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी का तबादला करने की मांग दोहराई है। पिता ने चेतावनी दी है कि जब तक एसएसपी का तबादला नहीं होता, वह अन्न का एक दाना भी नहीं खाएंगे।
परिवार के अनुसार, परविंदर झोटा का अंतिम संस्कार दिवाली के दिन किया जाएगा। उनकी पैतृक जमीन वाले खेत में ही चिता सजाई जाएगी। अंतिम विदाई का कार्यक्रम चकेरिया रोड स्थित जगह पर दोपहर 12 से 1 बजे के बीच रखा गया है।
पहले घर, फिर धरना स्थल पर ले जाया जाएगा पार्थिव शरीर
एक्शन कमेटी के मुताबिक, अंतिम संस्कार से पहले परविंदर झोटा के पार्थिव शरीर को उनके घर पर रखा जाएगा। इसके बाद उन्हें धरना स्थल पर ले जाया जाएगा, जहां लोग अंतिम दर्शन कर सकेंगे।
इससे पहले चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में झोटा का पोस्टमॉर्टम किया गया। उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार को पीजीआई पहुंचा था। बताया गया कि 24 दिनों तक फ्रीजर में रखे रहने के कारण शरीर का तापमान सामान्य होने में परेशानी आई।
पिता बोले- एसएसपी का तबादला होने तक नहीं खाऊंगा खाना
परविंदर झोटा के पिता भीम सिंह ने मांग की है कि बेटे के अंतिम संस्कार से पहले मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी का तबादला किया जाए। उनका आरोप है कि जिले में नशे पर प्रभावी रोक नहीं लगने के कारण उनके बेटे की हत्या हुई।
उन्होंने कहा कि जब तक एसएसपी का तबादला नहीं किया जाता, वह अन्न का एक दाना भी नहीं खाएंगे। पिता ने यह भी दावा किया कि इस मुद्दे पर कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के साथ हुई बैठक में भी चर्चा की जा चुकी है।
पत्नी ने ट्रोलिंग पर जताई नाराजगी
झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने सरकारी नौकरी और 2 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग को लेकर परिवार की हो रही आलोचना पर कड़ा एतराज जताया है।
उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे लोग 12 बोर की बंदूक लेकर मानसा आएं और उनके पूरे परिवार को गोली मार दें। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर परिवार को निशाना बनाए जाने के विरोध में आया है।
13 अक्टूबर को गोली मारकर हुई थी हत्या
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे। उनकी हत्या के बाद से परिवार और समर्थक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई, परिवार को मुआवजा और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
अब अंतिम संस्कार से पहले पिता की तबीयत बिगड़ने और एसएसपी के तबादले की मांग पर उनके अड़े रहने से मामला और गंभीर हो गया है।

