बेअदबी कानून के संशोधित मसौदे पर जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज की आपत्ति, सरकार पर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप

बेअदबी कानून के संशोधित मसौदे पर जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने जताई आपत्ति

पंजाबी दूरदर्शन | अमृतसर

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने बेअदबी रोकथाम कानून के संशोधित मसौदे पर पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस विषय को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया और पहले उठाई गई अधिकांश आपत्तियों को संशोधित मसौदे में शामिल नहीं किया।

सरकार पर लगाए ये आरोप

प्रेस वार्ता के दौरान जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि सिख पंथ से जुड़े विषयों पर निर्णय गुरु पंथ की सहमति से होने चाहिए। उनके अनुसार, ऐसा कोई कानून स्वीकार्य नहीं हो सकता जिसे व्यापक पंथक सहमति प्राप्त न हो।

उन्होंने कहा कि पिछले महीने श्री अकाल तख्त साहिब में सरकार के मंत्रियों और विधायकों के साथ हुई बैठक में कई बिंदुओं पर चर्चा हुई थी और विभिन्न सुझावों पर सहमति बनी थी।

संशोधित मसौदे पर क्या आपत्ति?

जत्थेदार के अनुसार, बैठक के दौरान सरकार से संशोधित मसौदा तैयार कर भेजने को कहा गया था। उनका कहना है कि निर्धारित समय के बाद प्राप्त मसौदे का अध्ययन करने पर यह सामने आया कि कई प्रमुख सुझावों को शामिल नहीं किया गया।

उन्होंने विशेष रूप से ‘कस्टोडियन’ शब्द हटाने, ‘बीड़’ शब्द स्पष्ट रूप से शामिल करने तथा बेअदबी मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया।

’90 प्रतिशत सुझाव स्वीकार नहीं किए गए’

जत्थेदार गड़गज्ज ने दावा किया कि जिन प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा हुई थी, उनमें से अधिकांश पर सरकार ने अपेक्षित संशोधन नहीं किए। उन्होंने कहा कि सरकार ने कुछ प्रावधानों की व्याख्या तो दी है, लेकिन मूल आपत्तियों का समाधान नहीं किया गया।

विधानसभा में चर्चा टालने की अपील

जत्थेदार ने कहा कि जब तक श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उठाई गई आपत्तियों और सुझावों पर सहमति नहीं बनती, तब तक प्रस्तावित बेअदबी कानून पर पंजाब विधानसभा में आगे की चर्चा नहीं की जानी चाहिए। उनका कहना है कि पहले सभी संबंधित पक्षों के बीच सहमति बनना आवश्यक है, उसके बाद ही विधायी प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए।

सरकार का पक्ष

इससे पहले पंजाब सरकार की ओर से कहा गया था कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा उठाई गई आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए संशोधित मसौदा तैयार कर सचिवालय को सौंप दिया गया है। सरकार का दावा है कि सुझावों के आधार पर आवश्यक संशोधन किए गए हैं।

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