Bihar में भटके पंजाब के बुजुर्ग को ChatGPT ने घर पहुंचाने में की मदद, 4 दिन बाद परिवार से मिला
पंजाब की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब के दर्शन करने गए लुधियाना के एक बुजुर्ग रास्ता भटककर बिहार पहुंच गए। परिवार कई दिनों तक उनकी तलाश करता रहा। इसी बीच गया में एक युवक ने उन्हें अकेले भटकते देखा और अपने घर ले जाकर कई दिनों तक उनकी देखभाल की।
बुजुर्ग को अपने गांव का नाम सिर्फ ‘फतेहगढ़ गुजरां’ याद था। युवक ने पहले गूगल मैप और इंटरनेट की मदद से गांव तलाशने की कोशिश की। बाद में ChatGPT की मदद से गांव का संभावित स्थान पता चला और आखिरकार बुजुर्ग को उनके परिवार तक पहुंचाया गया।
11 सितंबर को तीर्थ यात्रा पर गए थे चमन लाल
लुधियाना जिले के फतेहगढ़ गुजरां निवासी बुजुर्ग चमन लाल 11 सितंबर को मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना की बस से अमृतसर गए थे। बस से उतरने के बाद सभी श्रद्धालु श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने चले गए।
इसी दौरान चमन लाल अपने साथियों से अलग हो गए। परिवार के मुताबिक उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। साथियों को तलाशते हुए वह रेलवे स्टेशन की ओर चले गए।
गलती से बिहार जाने वाली ट्रेन में बैठे
रेलवे स्टेशन पर उन्हें बिहार जाने वाली ट्रेन मिली और वह उसमें सवार हो गए। उनके पास टिकट भी नहीं था। ट्रेन से वह गया रेलवे स्टेशन पहुंच गए।
उधर, अमृतसर में जब यात्रा में शामिल बाकी लोग वापस लौटने लगे तो चमन लाल उनके साथ नहीं मिले। परिवार को जानकारी दी गई और उनकी तलाश शुरू की गई।
पोते ने पुलिस में शिकायत के बाद जारी की फोटो
चमन लाल के पोते सुखचैन सिंह लुधियाना से अमृतसर पहुंचे और परिवार ने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। वह कई दिनों तक अमृतसर और आसपास के इलाकों में अपने दादा को तलाशते रहे।
गांव के लोगों ने भी सोशल मीडिया पर चमन लाल की तस्वीर शेयर कर लोगों से उनकी जानकारी देने की अपील की। करीब आठ दिन तक कोई सुराग नहीं मिलने से परिवार की चिंता बढ़ती गई।
गया स्टेशन पर नीरज ने बुजुर्ग को देखा
गया रेलवे स्टेशन पर चमन लाल अकेले भटक रहे थे। इसी दौरान गया निवासी नीरज की नजर उन पर पड़ी। बातचीत में नीरज को पता चला कि बुजुर्ग परेशान हैं और उन्हें अपने घर का पूरा पता याद नहीं है।
नीरज ने उन्हें खाना खिलाया और अपने घर ले गए। उन्होंने करीब चार दिन तक चमन लाल को अपने पास सुरक्षित रखा।
सिर्फ गांव का नाम था याद
नीरज के मुताबिक चमन लाल को अपने घर का पूरा पता याद नहीं था। वह सिर्फ अपने गांव का नाम फतेहगढ़ गुजरां बता पा रहे थे। चमन लाल पंजाबी बोल रहे थे, जिससे नीरज को अंदाजा हुआ कि वह पंजाब से हैं।
नीरज ने पहले Google Maps के जरिए गांव तलाशने की कोशिश की, लेकिन सटीक जानकारी नहीं मिल पाई। इसके बाद उन्होंने इंटरनेट और ChatGPT की मदद से गांव की लोकेशन खोजने की कोशिश जारी रखी।
ChatGPT और इंटरनेट की मदद से मिला रास्ता
कई प्रयासों के बाद नीरज को पता चला कि फतेहगढ़ गुजरां गांव लुधियाना जिले में माछीवाड़ा साहिब के आसपास स्थित है। इसके बाद उन्होंने चमन लाल को लेकर लुधियाना का रुख किया।
लुधियाना रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद दोनों बस से माछीवाड़ा पहुंचे और वहां स्थानीय लोगों से गांव के बारे में जानकारी लेने लगे।
मास्टर कृष्ण लाल ने फोटो देखकर पहचान लिया
माछीवाड़ा पहुंचने के बाद नीरज ने लोगों को चमन लाल की तस्वीर दिखाकर उनके बारे में पूछताछ की। इसी दौरान मास्टर कृष्ण लाल ने तस्वीर देखकर उन्हें पहचान लिया।
मास्टर कृष्ण लाल ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर चमन लाल की गुमशुदगी से संबंधित पोस्ट देखी थी। उन्होंने तुरंत उनके पोते सुखचैन सिंह को सूचना दी।
दादा को देखते ही भावुक हुआ पोता
जानकारी मिलते ही सुखचैन सिंह माछीवाड़ा पहुंचे। अपने दादा को सुरक्षित देखकर वह भावुक हो गए और उन्हें गले लगाकर रोने लगे।
परिवार ने चमन लाल को सुरक्षित रखने और उन्हें घर तक पहुंचाने के लिए नीरज का आभार जताया। सुखचैन सिंह ने नीरज के पैर छूकर और हाथ जोड़कर उनका धन्यवाद किया।
9वीं कक्षा से लोगों की मदद कर रहे हैं नीरज
नीरज ने बताया कि वह गया में कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं। उनके अनुसार, वह लंबे समय से जरूरतमंद और भटके हुए लोगों की मदद करते रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जब वह 9वीं कक्षा में पढ़ते थे, तभी से समाज सेवा और जरूरतमंद लोगों की मदद करने का काम करते आ रहे हैं।
चमन लाल के परिवार से दोबारा मिलन की यह कहानी इंसानियत और तकनीक के साथ मिलकर किसी जरूरतमंद तक पहुंचने की एक मिसाल बन गई।

