बेअदबी कानून पर जत्थेदार गड़गज की सरकार को सलाह, बोले- अकाल तख्त की कमेटी से करे बातचीत
फरीदकोट | पंजाबी दूरदर्शन
श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता, पंथक चेतना और सिख विरासत से युवाओं को जोड़ने के उद्देश्य से निकाला जा रहा ‘मीरी-पीरी खालसा मार्च’ शनिवार को नौवें दिन में प्रवेश कर गया। इस दौरान कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने बेअदबी कानून को लेकर पंजाब सरकार से संवाद और सहमति के आधार पर समाधान निकालने की अपील की।
सरकार से कमेटी के साथ चर्चा की अपील
फरीदकोट जिले के जैतो स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा गंगसर साहिब से श्री मुक्तसर साहिब के लिए रवाना होने से पहले संगत को संबोधित करते हुए जत्थेदार गड़गज ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में बेअदबी के मामलों पर प्रभावी और स्थायी कानून बनाना चाहती है, तो उसे श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित उच्चस्तरीय कमेटी के साथ विस्तृत विचार-विमर्श करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस विषय पर किसी भी प्रकार की राजनीतिक चालबाजी से बचना आवश्यक है।
संशोधनों को शामिल करने की अपील
जत्थेदार ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से सुझाए गए संशोधनों को शामिल करने से प्रस्तावित ‘श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026’ अधिक व्यावहारिक, व्यापक और प्रभावी बन सकता है। उनके अनुसार इससे दोषियों में कानून का डर बढ़ेगा और समाज में विश्वास तथा सौहार्द भी मजबूत होगा।
मीरी-पीरी सिद्धांत का किया उल्लेख
ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी द्वारा स्थापित मीरी-पीरी सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि सिख परंपरा में धर्म और राजनीति का समन्वय महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जो लोग दोनों को अलग-अलग मानते हैं, वे सिख सिद्धांतों की मूल भावना को नहीं समझते।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में सिख समुदाय का राजनीतिक रूप से सशक्त होना आवश्यक है।
जैतो मोर्चे का किया जिक्र
अपने संबोधन में उन्होंने ऐतिहासिक जैतो मोर्चे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं था, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और सिख स्वाभिमान की रक्षा का आंदोलन भी था। उन्होंने कहा कि जब-जब कौम अपने सिद्धांतों से दूर हुई, तब-तब पंथक संस्थाओं पर चुनौतियां बढ़ीं।
श्री मुक्तसर साहिब की ओर बढ़ा मार्च
‘मीरी-पीरी खालसा मार्च’ का रास्ते में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। गिद्दड़बाहा में युवाओं ने केसरी और पीली दस्तारें पहनकर मार्च का अभिनंदन किया। विशेष रूप से सुसज्जित वाहनों पर गुरु साहिबानों और महान शहीदों के प्रतीक स्वरूप शस्त्र एवं चित्र श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने। शनिवार रात मार्च का अगला पड़ाव श्री मुक्तसर साहिब में रहेगा।

