Punjab DA Arrears: कर्मचारियों के DA पर सरकार का जवाब, चीमा बोले- वेतन पर राजस्व का 51% खर्च; 4,500 करोड़ एरियर चुकाया

पंजाब में DA बकाया को लेकर सरकार का जवाब, चीमा बोले- कर्मचारियों पर राजस्व का 51% खर्च

चंडीगढ़: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों के लंबित महंगाई भत्ते (DA) को लेकर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच चल रही बहस के बीच तीन मंत्रियों ने सरकार का पक्ष सामने रखा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, अमन अरोड़ा और बलजीत कौर ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वेतन, DA और पुराने एरियर से जुड़े मुद्दों पर जानकारी दी।

हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया कि पंजाब के सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला वेतन देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है। उन्होंने कहा कि बेसिक पे और DA को मिलाकर पंजाब के कर्मचारियों की आय हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के मुकाबले ज्यादा है।

कर्मचारियों और पेंशनरों पर खर्च हो रहा 51% राजस्व

चीमा के मुताबिक पंजाब सरकार अपने कुल राजस्व का लगभग 51 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन एवं पेंशन पर खर्च कर रही है। उन्होंने दावा किया कि अन्य राज्यों में यह अनुपात औसतन करीब 38 प्रतिशत के आसपास है।

मंत्री ने कहा कि गुजरात जैसे राज्यों के कर्मचारियों की तुलना में भी पंजाब के सरकारी कर्मचारियों का वेतन अधिक है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ पदों पर पंजाब सरकार के कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी केंद्र सरकार के समान पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों से भी ज्यादा है।

DA बढ़कर 42 प्रतिशत हुआ: सरकार

चीमा ने बताया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल की शुरुआत में कर्मचारियों को 28 प्रतिशत DA मिल रहा था। इसके बाद इसे अलग-अलग चरणों में बढ़ाया गया। उनके अनुसार अक्टूबर में यह 34 प्रतिशत, दिसंबर 2023 में 38 प्रतिशत और नवंबर 2024 में 42 प्रतिशत किया गया।

सरकार का कहना है कि DA को लेकर विपक्ष की ओर से पेश किए जा रहे कुछ आंकड़े वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाते।

पुराने एरियर पर भी सरकार ने रखा पक्ष

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुराने DA एरियर का मुद्दा भी उठा। चीमा के अनुसार करीब 14,191 करोड़ रुपये का बकाया 2016 से 2021 के बीच का है।

उन्होंने कहा कि यह राशि पिछली सरकारों के कार्यकाल से जुड़ी है और मौजूदा सरकार इसका भुगतान कर रही है। सरकार के मुताबिक कर्मचारियों और पेंशनरों को अब तक करीब 4,500 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।

चीमा ने कहा कि सरकार ने हाईकोर्ट में भुगतान को लेकर एक लिक्विडेशन प्लान भी पेश किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार किया था।

हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

DA से जुड़े विवाद में न्यायिक प्रक्रिया भी जारी है। सरकार द्वारा हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद कर्मचारी पक्ष की ओर से हाईकोर्ट में एक और याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इस वजह से DA और एरियर का मुद्दा फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ कानूनी स्तर पर भी चर्चा में है।

बलजीत कौर बोलीं- DA के नियम राज्य सरकार तय करती है

मंत्री बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब में कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और DA से जुड़े प्रावधान पंजाब सिविल सर्विस रिवाइज्ड पे रूल्स, 2021 और संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत निर्धारित होते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य के नियमों में केंद्रीय कर्मचारियों के DA को उसी अनुपात में लागू करने की कोई अनिवार्यता नहीं है। उनके मुताबिक DA की दर और उसे लागू करने का समय राज्य सरकार अपने नियमों और वित्तीय परिस्थितियों के आधार पर तय कर सकती है।

आर्टिकल 14 को लेकर चीमा ने विपक्ष से पूछा सवाल

DA के मुद्दे पर संविधान के अनुच्छेद 14 को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज है। चीमा ने विपक्षी नेताओं से सवाल किया कि यदि वे समानता के संवैधानिक प्रावधान का हवाला दे रहे हैं, तो उन्हें दूसरे राज्यों की व्यवस्था को भी सामने रखना चाहिए।

उन्होंने बीजेपी शासित राज्यों में कर्मचारियों के DA और वेतन की स्थिति का भी जिक्र करते हुए विपक्ष से अपने दावों को तथ्यों के साथ रखने की मांग की।

अमन अरोड़ा बोले- बातचीत से निकले समाधान

मंत्री अमन अरोड़ा ने कर्मचारियों को सरकार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका अहम है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की अपनी मांगें हो सकती हैं और सरकार को उन पर बातचीत करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर कर्मचारियों को गुमराह करने का आरोप लगाया।

अरोड़ा ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य की पूरी आबादी के हितों को ध्यान में रखते हुए वित्तीय फैसले लेने पड़ते हैं। उन्होंने कर्मचारी संगठनों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।

सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत पर जोर

DA और बकाया एरियर को लेकर विवाद के बीच सरकार ने एक ओर अपनी वित्तीय स्थिति और अब तक किए गए भुगतान का हवाला दिया है, वहीं कर्मचारी पक्ष अपनी मांगों को लेकर कानूनी और संगठनात्मक स्तर पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और सरकार-कर्मचारी वार्ता पर सबकी नजर रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *