हरिके पत्तन में बनेगा भाई जसवंत सिंह खालड़ा की याद में स्मारक, SGPC ने किया ऐलान
अमृतसर: मानवाधिकार कार्यकर्ता भाई जसवंत सिंह खालड़ा और अन्य शहीदों की स्मृति में श्री अकाल तख्त साहिब में शहीदी समागम आयोजित किया गया। इस दौरान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से हरिके पत्तन में भाई खालड़ा की याद में स्मारक बनाए जाने की घोषणा की गई।
समागम में बड़ी संख्या में संगत और पंथक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। गुरुद्वारा शहीद बाबा गुरबख्श सिंह जी के स्थान पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद कीर्तन और श्रद्धांजलि कार्यक्रम हुआ।
अकाल तख्त जत्थेदार ने शहीदों के योगदान को याद किया
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सिख परंपरा में शहादत को विशेष सम्मान प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं और शहीदों ने धर्म, इंसाफ और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण बलिदान दिए। उनके अनुसार इन बलिदानों से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलती है।
SGPC प्रधान ने स्मारक बनाने का किया ऐलान
SGPC प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भाई जसवंत सिंह खालड़ा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके मानवाधिकारों से जुड़े काम को याद किया।
धामी ने कहा कि भाई खालड़ा ने पंजाब में लावारिस घोषित किए गए शवों और कथित तौर पर अज्ञात तरीके से किए गए अंतिम संस्कारों का मुद्दा उठाया था। उनके अनुसार खालड़ा ने मानवाधिकारों से जुड़े मामलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया।
उन्होंने घोषणा की कि श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश के अनुसार हरिके पत्तन में भाई जसवंत सिंह खालड़ा की स्मृति में स्मारक का निर्माण किया जाएगा।
गोल्डन टेंपल में बेअदबी मामले पर भी जानकारी
समागम के दौरान श्री दरबार साहिब परिसर में गुटका साहिब के अंगों के साथ कथित बेअदबी की घटना का मुद्दा भी उठाया गया।
SGPC प्रधान ने बताया कि CCTV फुटेज की जांच के बाद पुलिस ने कथित आरोपी की पहचान कर उसे हिरासत में लिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी गंभीर घटना को केवल मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा मामला बताकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और मामले की गंभीरता से जांच जरूरी है।
विदेशों में सिखों पर हमलों को लेकर चिंता
हरजिंदर सिंह धामी ने कनाडा और अमेरिका में सिख पहचान से जुड़े लोगों पर कथित हमलों को लेकर भी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि सिख धर्म मानवता की भलाई और सभी के सम्मान का संदेश देता है। उनके मुताबिक सिख सिद्धांतों में नफरत, भेदभाव और जातिगत ऊंच-नीच के लिए कोई स्थान नहीं है।
उन्होंने विदेशों में सिख समुदाय की सुरक्षा और धार्मिक पहचान के सम्मान को लेकर संबंधित सरकारों से उचित कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शहीदों की स्मृति को आगे बढ़ाने पर जोर
शहीदी समागम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मानवाधिकारों और न्याय के लिए संघर्ष करने वाले लोगों की स्मृति को जीवित रखना समाज की जिम्मेदारी है। हरिके पत्तन में प्रस्तावित स्मारक को भाई जसवंत सिंह खालड़ा की विरासत और उनके मानवाधिकार संबंधी कार्यों की याद से जोड़कर देखा जा रहा है।

