Punjab Pehchan Portal: अब ऑनलाइन होगी अज्ञात शवों की पहचान
पंजाब में अज्ञात शवों की पहचान और उनके अंतिम संस्कार से जुड़ी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई पहल शुरू की है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलवीर सिंह ने 2 सितंबर को ‘पहचान’ पोर्टल लॉन्च किया।
इस पोर्टल के जरिए पंजाब के सरकारी अस्पतालों और मोर्चरी में रखे गए अज्ञात शवों की तस्वीरें, उपलब्ध पहचान संबंधी जानकारी और अन्य जरूरी विवरण ऑनलाइन देखे जा सकेंगे। इसका उद्देश्य ऐसे परिवारों की मदद करना है, जो अपने लापता परिजनों की तलाश में अलग-अलग अस्पतालों और पुलिस थानों के चक्कर लगाते हैं।
पोर्टल लॉन्च होने के शुरुआती तीन दिनों में ही करीब 270 अज्ञात शवों की तस्वीरें अपलोड किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, पिछले 24 घंटे में लगभग 350 लोगों ने OTP के जरिए लॉगिन कर पोर्टल को एक्सेस किया।
पंजाब में हर साल मिलते हैं हजारों अज्ञात शव
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर साल लगभग 6,000 से 7,000 अज्ञात शव बरामद होते हैं।
मौजूदा व्यवस्था के तहत ऐसे शवों को करीब 72 घंटे तक मोर्चरी में सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद पहचान के लिए अखबारों में सूचना प्रकाशित कराने जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती थी।
बताया गया है कि इस पारंपरिक व्यवस्था से केवल करीब 5 प्रतिशत मामलों में ही पहचान हो पाती थी, जबकि बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं हो पाती थी।
इसी समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कई वर्षों की तैयारी के बाद ‘पहचान’ पोर्टल तैयार किया है।
मोबाइल नंबर और OTP से कर सकेंगे लॉगिन
पोर्टल को आम लोगों के लिए आसान रखने की कोशिश की गई है। नागरिक अपने मोबाइल नंबर और OTP के माध्यम से लॉगिन कर सकते हैं।
अज्ञात शवों की जानकारी उपलब्ध कराते समय उनकी गरिमा और निजता का भी ध्यान रखा जा रहा है। इसी वजह से हर मामले में केवल चेहरे की तस्वीर दिखाना जरूरी नहीं होगा।
पहचान के लिए कपड़े और खास निशान भी होंगे मददगार
पोर्टल पर अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार पहचान से जुड़ी तस्वीरें और जानकारी अपलोड की जा रही हैं।
इनमें शामिल हो सकते हैं:
- चेहरे की तस्वीर
- शरीर पर मौजूद विशेष पहचान चिह्न
- कपड़ों और जूतों की जानकारी
- टैटू
- पुराने ऑपरेशन के निशान
- कद-काठी से जुड़ी जानकारी
- अंगूठी या कलावा जैसी पहचान योग्य वस्तुएं
- शरीर पर बने या लिखे पारिवारिक नाम
यदि किसी शव का चेहरा पहचानने योग्य स्थिति में नहीं है, तो ऐसे मामलों में पहचान चिह्न, कपड़े और दूसरी संबंधित वस्तुओं की जानकारी पर ज्यादा जोर दिया जाएगा।
इससे परिजनों को बिना शव को प्रत्यक्ष रूप से देखे शुरुआती स्तर पर संभावित पहचान करने में मदद मिल सकती है।
परिजन ऑनलाइन कर सकेंगे शव पर क्लेम
यदि किसी व्यक्ति को पोर्टल पर उपलब्ध तस्वीर या विवरण अपने लापता परिजन से मिलता-जुलता लगता है, तो वह ऑनलाइन क्लेम फॉर्म भर सकता है।
इसमें आवेदक को अपनी पहचान और मृतक से संबंध जैसी जानकारी देनी होगी। फॉर्म जमा होने के बाद संबंधित मोर्चरी के डॉक्टर और थाना पुलिस को इसकी सूचना मिलने की व्यवस्था की गई है।
इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा आवश्यक दस्तावेजों और पहचान का सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन पूरा होने पर शव को कानूनी प्रक्रिया के तहत परिजनों को सौंपा जा सकेगा।
इलेक्ट्रॉनिक श्मशान गृह बनाने की भी योजना
स्वास्थ्य विभाग अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार से जुड़ी व्यवस्था को भी आधुनिक बनाने पर विचार कर रहा है।
प्रस्ताव के तहत राज्य के सरकारी सिविल अस्पतालों में इलेक्ट्रॉनिक क्रेमेटोरियम स्थापित करने की योजना पर चर्चा चल रही है। हालांकि, इस प्रस्ताव को अभी अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
वर्तमान में लकड़ी से अंतिम संस्कार में प्रति शव करीब 5,000 से 10,000 रुपये तक खर्च होने की बात बताई गई है। इलेक्ट्रॉनिक दाह गृह से खर्च और प्रदूषण दोनों कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, अंतिम संस्कार के बाद राख और अस्थियों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी की जा सकती है, ताकि भविष्य में पहचान होने पर उन्हें परिजनों को सौंपा जा सके।
PCMSA ने पहल का किया स्वागत
पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (PCMSA) ने ‘पहचान’ पोर्टल की शुरुआत का स्वागत किया है।
एसोसिएशन की ओर से इसे अज्ञात शवों की गरिमा बनाए रखने और उनके परिजनों तक पहुंचने की दिशा में संवेदनशील कदम बताया गया है।
डिजिटल पोर्टल से बदल सकती है पुरानी व्यवस्था
‘पहचान’ पोर्टल का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि लापता व्यक्ति के परिजन अब केवल स्थानीय स्तर पर सूचना तलाशने तक सीमित नहीं रहेंगे। एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध जानकारी के जरिए वे पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में मिले अज्ञात शवों से संबंधित रिकॉर्ड देख सकेंगे।
अगर पोर्टल की जानकारी नियमित रूप से अपडेट होती रही और पुलिस व अस्पतालों के रिकॉर्ड से इसका प्रभावी तालमेल बना, तो अज्ञात शवों की पहचान की प्रक्रिया पहले की तुलना में तेज और अधिक पारदर्शी हो सकती है।

