Vadda Grewal Acquitted: NDPS केस में पंजाबी सिंगर को बड़ी राहत
मोहाली: पंजाबी गायक गुरिंदरपाल सिंह उर्फ वड्डा गरेवाल को NDPS एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में मोहाली की विशेष अदालत ने बरी कर दिया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूतों और गवाहों के बयानों में सामने आई कमियों को देखते हुए आरोपी को संदेह का लाभ दिया।
यह मामला थाना सोहाना पुलिस ने अप्रैल 2020 में दर्ज किया था। पुलिस ने अस्पताल में भर्ती वड्डा गरेवाल के पास से 30 ग्राम अफीम बरामद होने का दावा किया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान अभियोजन की कहानी को साबित करने के लिए जरूरी साक्ष्यों को लेकर अदालत के सामने कई सवाल सामने आए।
अस्पताल के कमरे में दूसरे बेड पर था बैग
मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि आरोपी अस्पताल के कमरा नंबर 412 में भर्ती था। कमरे में दो बेड मौजूद थे और जिस बैग से अफीम बरामद होने का दावा किया गया, वह आरोपी के बेड पर नहीं बल्कि दूसरे बेड पर रखा था।
जांच अधिकारी ने अदालत में यह भी स्वीकार किया कि बैग से आरोपी की पहचान से जुड़ा कोई दस्तावेज या निजी सामान नहीं मिला। जांच अधिकारी के मुताबिक यह संभावना भी पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती थी कि बैग किसी अन्य व्यक्ति का हो।
अस्पताल के कर्मचारियों और विजिटर रिकॉर्ड की जांच नहीं हुई
अदालत के समक्ष यह भी बात सामने आई कि पुलिस ने अस्पताल के कर्मचारियों के बयान दर्ज नहीं किए। इसके अलावा अस्पताल के विजिटर रजिस्टर की भी जांच नहीं की गई।
ऐसे में यह स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं आ सका कि घटना के समय अस्पताल के कमरे में आरोपी के अलावा कौन-कौन लोग मौजूद थे या वहां किसकी आवाजाही हुई थी।
पुलिस गवाह के बयान में भी सामने आया विरोधाभास
मामले में पुलिस की ओर से पेश किए गए एक गवाह के बयान में भी बदलाव का मुद्दा सामने आया। कार्यवाहक थाना प्रभारी एसआई बरमा सिंह ने अपने बयान में कथित तौर पर पहले कहा था कि आरोपी को उनके सामने थाने में पेश किया गया था।
बाद में उनके बयान में बदलाव आया और उन्होंने कहा कि उनके पास केवल केस प्रॉपर्टी लाई गई थी। अदालत के सामने इस तरह के विरोधाभास भी अभियोजन के मामले को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल रहे।
NDPS एक्ट की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
मामले में तलाशी और जांच की प्रक्रिया को लेकर भी अदालत के समक्ष सवाल उठे। बचाव पक्ष ने NDPS एक्ट की धारा 42 और धारा 57 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के पालन पर सवाल उठाए।
इसके अलावा तलाशी के दौरान अस्पताल से किसी स्वतंत्र व्यक्ति को गवाह बनाए जाने का भी रिकॉर्ड नहीं मिला।
डोप टेस्ट को लेकर भी अभियोजन कमजोर पड़ा
पुलिस ने आरोपी के नशीले पदार्थ के सेवन से संबंधित डोप टेस्ट का भी उल्लेख किया था। हालांकि, आरोपी के नमूने को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजे जाने का रिकॉर्ड सामने नहीं आया।
जिस डॉक्टर ने डोप टेस्ट रिपोर्ट तैयार की थी, उसे भी अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह के तौर पर पेश नहीं किया गया। इससे संबंधित मेडिकल साक्ष्य को लेकर भी अभियोजन की स्थिति कमजोर हुई।
शराब के अत्यधिक सेवन का भी सामने आया था पहलू
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आने की बात कही गई कि आरोपी को अस्पताल में शराब के अत्यधिक सेवन के कारण भर्ती कराया गया था। ऐसे में अस्पताल में भर्ती होने और कथित नशीले पदार्थ के सेवन के बीच संबंध स्थापित करने को लेकर भी जांच के पहलुओं पर सवाल उठे।
15 अप्रैल 2020 को अस्पताल से मिली थी सूचना
पुलिस के अनुसार, 15 अप्रैल 2020 को थाना सोहाना को श्री हरकृष्ण अस्पताल से सूचना मिली थी कि गुरिंदर पाल सिंह उर्फ वड्डा गरेवाल नशीले पदार्थ की ओवरडोज के कारण अस्पताल में भर्ती है।
सूचना मिलने के बाद एसआई हरजिंदर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम अस्पताल पहुंची। वहां कमरा नंबर 412 में आरोपी को बेड पर पाया गया।
पुलिस ने 30 ग्राम अफीम बरामद करने का किया था दावा
पुलिस की कहानी के मुताबिक, कमरे में मौजूद एक बैग पर संदेह होने के बाद उसकी तलाशी ली गई। तलाशी से पहले आरोपी को NDPS एक्ट की धारा 50 के तहत उसके अधिकारों की जानकारी दिए जाने का दावा किया गया।
पुलिस के अनुसार, बैग की तलाशी में पॉलीथिन में रखी 30 ग्राम अफीम बरामद हुई। बरामद पदार्थ का वजन करने के बाद उसे सील कर जब्ती मेमो के जरिए कब्जे में लिया गया।
इसके बाद पुलिस ने रुक्का भेजकर थाना सोहाना में FIR नंबर 145 दर्ज की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
एलि मांगट से करीबी का भी था जिक्र
मामले की पृष्ठभूमि में वड्डा गरेवाल के पंजाबी गायक एलि मांगट के समर्थन में सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने का भी जिक्र सामने आया। पुलिस का आरोप था कि इन गतिविधियों के कारण एक पुराने मामले से जुड़े विवाद के दौरान भीड़ जुटी थी।
वहीं, आरोपी की ओर से पुलिस पर रंजिश के चलते उसे झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगाया गया था। अदालत के समक्ष ये आरोप और बचाव पक्ष की दलीलें सुनवाई का हिस्सा रहे।
अदालत के फैसले से मिली बड़ी राहत
अंततः अदालत ने अभियोजन पक्ष के सबूतों और गवाहियों में मौजूद कमियों को देखते हुए वड्डा गरेवाल को संदेह का लाभ दिया और NDPS मामले में बरी कर दिया।
यह फैसला इस मामले तक सीमित है और अदालत द्वारा आरोपी को बरी किया जाना इस बात का न्यायिक निष्कर्ष है कि अभियोजन आरोपों को आवश्यक कानूनी मानक पर साबित नहीं कर सका।

