Punjab Power Crisis: थर्मल प्लांटों के 4 यूनिट बंद, बिजली उत्पादन 3,642 MW तक गिरा; गर्मी में लंबे कट का खतरा

Punjab Power Crisis: थर्मल प्लांटों के 4 यूनिट बंद, बिजली संकट गहराया

पंजाब में बिजली की मांग बढ़ने के बीच उत्पादन में कमी ने चिंता बढ़ा दी है। राज्य के कई थर्मल पावर प्लांट पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। गुरुवार को प्रदेश के 4 थर्मल यूनिट बंद रहने की जानकारी सामने आई, जबकि कुछ अन्य यूनिटों में क्षमता से काफी कम बिजली बन रही है।

तलवंडी साबो, राजपुरा, रोपड़ और गोइंदवाल के प्लांटों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। इससे पंजाब का अपना बिजली उत्पादन करीब 4,800 मेगावाट से घटकर 3,642 मेगावाट के आसपास पहुंच गया।

यदि उत्पादन और मांग के बीच अंतर आगे बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को ज्यादा समय तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है।

तलवंडी साबो की यूनिट भी बंद

पंजाब के निजी थर्मल प्लांटों में तलवंडी साबो का प्लांट सबसे अहम है। इसकी तीन यूनिटों की कुल क्षमता करीब 1,980 मेगावाट है और प्रत्येक यूनिट 660 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता रखती है।

गुरुवार को इनमें से एक यूनिट बंद रही, जिससे करीब 660 मेगावाट क्षमता का उत्पादन प्रभावित हुआ। प्लांट की कुल मौजूदा उत्पादन क्षमता करीब 1,191 मेगावाट बताई गई है।

यूनिट बंद होने की वजह कोयले की कमी है या तकनीकी समस्या, इसे लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

राजपुरा में आधी क्षमता से भी कम उत्पादन

राजपुरा के निजी थर्मल पावर प्लांट में दो यूनिट हैं और इसकी कुल क्षमता 1,400 मेगावाट है।

गुरुवार को यहां करीब 672 मेगावाट बिजली उत्पादन हुआ। यानी प्लांट अपनी कुल क्षमता के आधे से भी कम पर चल रहा है।

राजपुरा में कई दिनों से उत्पादन क्षमता से कम रहने की बात सामने आ रही है।

रोपड़ और गोइंदवाल में भी यूनिट बंद

सरकारी थर्मल प्लांटों की स्थिति भी पूरी तरह सामान्य नहीं है।

रोपड़ थर्मल प्लांट की कुल क्षमता 840 मेगावाट है। यहां चार यूनिट हैं, लेकिन एक यूनिट कई दिनों से बंद है। गुरुवार को प्लांट से करीब 347 मेगावाट बिजली उत्पादन हुआ।

दूसरी ओर, गोइंदवाल थर्मल प्लांट की दो यूनिटों में से एक बंद रही। इसकी कुल क्षमता 520 मेगावाट है और चालू यूनिट से करीब 243 मेगावाट बिजली उत्पादन दर्ज किया गया।

लहरा मोहब्बत से मिली राहत

बिजली संकट के बीच लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट से कुछ राहत मिली है। इसकी चारों यूनिट गुरुवार को चल रही थीं।

प्लांट की कुल क्षमता करीब 920 मेगावाट है और यहां लगभग 805 मेगावाट बिजली उत्पादन हुआ।

इससे बंद और कम क्षमता पर चल रहे अन्य थर्मल यूनिटों से पैदा हुए अंतर को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल रही है।

हाइड्रो पावर ने संभाला मोर्चा

पंजाब में इस समय हाइड्रो प्रोजेक्ट भी बिजली आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

गुरुवार को छोटे-बड़े हाइड्रो प्रोजेक्टों से करीब 834 मेगावाट बिजली उत्पादन होने की जानकारी है। डैमों में पर्याप्त पानी होने के कारण हाइड्रो प्रोजेक्टों से उत्पादन फिलहाल बेहतर बना हुआ है।

ऐसे में थर्मल प्लांटों के कम उत्पादन के बीच हाइड्रो पावर राज्य के लिए अहम सहारा बनी हुई है।

दिन में सोलर से उत्पादन, रात में बढ़ता दबाव

सोलर पावर से दोपहर के समय करीब 385 मेगावाट बिजली मिलने की बात सामने आई है। इसके अलावा अन्य स्रोतों से लगभग 17 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है।

लेकिन रात में सोलर प्लांट बिजली नहीं बना पाते। ऐसे में शाम और रात के समय बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ जाता है।

16 हजार MW से ज्यादा पहुंची बिजली की मांग

पंजाब में इन दिनों बिजली की मांग 16,000 मेगावाट से ऊपर चल रही है। दूसरी तरफ राज्य के अपने पावर प्लांटों से उत्पादन कम हो रहा है।

मांग और उपलब्ध उत्पादन के बीच इस अंतर को पूरा करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी PSPCL केंद्रीय बिजली पूल से बड़ी मात्रा में बिजली खरीद रहा है।

गुरुवार को PSPCL द्वारा केंद्रीय पूल से करीब 11,770 मेगावाट बिजली लेने की जानकारी दी गई।

महंगी बिजली खरीदने का बढ़ रहा दबाव

केंद्रीय पूल से बिजली लेने के कारण राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव भी पड़ रहा है। वहीं, मांग अधिक रहने के चलते कुछ क्षेत्रों में बिजली कटौती की स्थिति बनी हुई है।

अगर थर्मल प्लांटों के बंद यूनिट जल्द शुरू नहीं होते और बिजली उत्पादन में सुधार नहीं आता, तो आने वाले दिनों में बिजली की मांग और उपलब्धता का अंतर बढ़ सकता है।

ऐसे में पंजाब के लोगों को लंबे बिजली कटों का सामना करना पड़ सकता है, खासकर अधिक मांग वाले समय में।

फिलहाल हाइड्रो और केंद्रीय बिजली पर निर्भरता

राज्य में थर्मल उत्पादन प्रभावित होने के बाद फिलहाल हाइड्रो पावर और केंद्रीय पूल से मिलने वाली बिजली पर निर्भरता बढ़ गई है। वहीं सोलर बिजली केवल दिन के समय मदद कर रही है।

अब बिजली व्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि बंद थर्मल यूनिट कब तक दोबारा उत्पादन शुरू करते हैं और कोयले की उपलब्धता में कितना सुधार आता है।

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