Harbhajan Singh Bajwa Death: अंतरराष्ट्रीय फोटो आर्टिस्ट हरभजन सिंह बाजवा का 85 साल की उम्र में निधन, बटाला में अंतिम संस्कार
बटाला: प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय फोटो आर्टिस्ट, लेखक और कला-साहित्य से जुड़े व्यक्तित्व हरभजन सिंह बाजवा का 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से पंजाबी साहित्य, कला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है। रविवार को बटाला के श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
पंजाबी लोक विरासत अकादमी के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल समेत कई साहित्यिक और सांस्कृतिक हस्तियों ने बाजवा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
महान चित्रकार एस. सोभा सिंह के शिष्य रहे
हरभजन सिंह बाजवा का कला जगत से गहरा संबंध रहा। वह महान चित्रकार एस. सोभा सिंह के शिष्य थे। पेंटिंग की बारीकियां सीखने के लिए वह हिमाचल प्रदेश के अंद्रेटा स्थित सोभा सिंह के स्टूडियो भी गए थे।
बाजवा ने फोटोग्राफी और कला के माध्यम से पंजाबी लोक जीवन और विरासत को दस्तावेज के रूप में सहेजने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अपना फोटो संग्रह और लाइब्रेरी किया समर्पित
हरभजन सिंह बाजवा ने अपनी ऐतिहासिक तस्वीरों, स्लाइड्स और फोटो संग्रह ‘पंजाबी साथ लांबड़ा’ को दान कर दिया था। वहीं, उन्होंने अपनी निजी लाइब्रेरी बाबा आया सिंह रियारकी कॉलेज, तुगलवाला (गुरदासपुर) को सौंप दी।
उनके इस योगदान से आने वाली पीढ़ियों के लिए पंजाबी इतिहास, संस्कृति और कला से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री सुरक्षित हो सकी।
साहित्य में भी बनाई अलग पहचान
फोटो पत्रकारिता के साथ-साथ हरभजन सिंह बाजवा ने साहित्य के क्षेत्र में भी सक्रिय योगदान दिया। उन्होंने कई रचनाएं लिखीं, जिनमें प्रमुख रूप से ‘सुक्के कखन नीचे आग’, ‘मौत एक आस दी’ और ‘तारे की एक बोतल’ शामिल हैं।
उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं के लिए फोटो रिपोर्टर के रूप में भी काम किया और अपनी अलग पहचान बनाई।
लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से हुए सम्मानित
कला और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए 14 अप्रैल 2024 को एस. उत्तम सिंह निज्जर फाउंडेशन की ओर से उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
बाबा आया सिंह रियारकी कॉलेज के प्रिंसिपल स्वर्ण सिंह विर्क के अनुसार, कॉलेज की लाइब्रेरी में उनके सम्मान में ‘हरभजन सिंह बाजवा विंग’ भी स्थापित किया गया है।
साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत ने दी श्रद्धांजलि
पंजाबी लोक विरासत अकादमी के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने बाजवा के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि डॉ. नरेश कुमार और गगनदीप सिंह विर्क ने बाजवा के महत्वपूर्ण कलात्मक कार्यों को सुरक्षित रखने और आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
अंतिम संस्कार और शोक सभा के दौरान पंजाबी साहित्य और संस्कृति से जुड़े कई दिग्गजों के योगदान को भी याद किया गया। साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने बाजवा के निधन को पंजाबी कला और विरासत के लिए बड़ी क्षति बताया।
हरभजन सिंह बाजवा की तस्वीरों, लेखन और संग्रह के जरिए पंजाबी लोक जीवन और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।

