Sanjeev Arora Property Case: ED ने GLADA CA को किया तलब, 15 सितंबर को दस्तावेजों के साथ पेश होने के आदेश

Sanjeev Arora Property Case: ED ने GLADA CA को किया तलब, 15 सितंबर को दस्तावेजों के साथ पेश होने के आदेश

पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़ी प्रॉपर्टी के चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच आगे बढ़ गई है। ED ने ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GLADA) के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर विकास हीरा को पूछताछ के लिए तलब किया है।

जारी समन के मुताबिक, विकास हीरा को 15 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से ED के सामने पेश होने के लिए कहा गया है। एजेंसी ने उन्हें रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RPIL) से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज और रिकॉर्ड भी साथ लाने के निर्देश दिए हैं। यह कंपनी अब हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड के नाम से जानी जाती है।

इंडस्ट्रियल प्लॉट के CLU पर ED की नजर

जांच एजेंसी का मुख्य फोकस पंजाब स्मॉल इंडस्ट्री एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन द्वारा आवंटित एक इंडस्ट्रियल प्लॉट के कथित तौर पर आवासीय उपयोग में बदलने की प्रक्रिया पर है।

ED यह जांच कर रही है कि संबंधित जमीन के औद्योगिक से आवासीय उपयोग में परिवर्तन के दौरान निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।

जांच में खास तौर पर वर्ष 2019 में हुई CLU प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और अधिकारियों द्वारा लिए गए फैसलों की पड़ताल की जा रही है।

50 प्रतिशत औद्योगिक विकास से जुड़ा नियम जांच के केंद्र में

मामले से जुड़े नियमों के मुताबिक, सरकारी जमीन औद्योगिक गतिविधि के लिए आवंटित होने के बाद उसके दूसरे उपयोग की अनुमति देने से पहले निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है।

जांच में यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या संबंधित जमीन पर निर्धारित 50 प्रतिशत औद्योगिक विकास की शर्त पूरी होने के पर्याप्त दस्तावेज और प्रमाण प्राधिकरण के सामने पेश किए गए थे।

ED अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि CLU की मंजूरी देते समय जमीन की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन और जरूरी दस्तावेजी जांच किस स्तर तक की गई थी।

स्व-घोषणा पत्र पर मंजूरी देने का आरोप

जांच से जुड़े दावों के अनुसार, वर्ष 2019 में CLU प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों ने कथित तौर पर जमीनी सत्यापन के बजाय स्व-घोषणा पत्र को आधार बनाया।

एजेंसी यह जांच कर रही है कि क्या औद्योगिक विकास की निर्धारित शर्त पूरी होने के संबंध में पर्याप्त रिकॉर्ड उपलब्ध थे या नहीं। इसी प्रक्रिया में कथित प्रशासनिक अनियमितताओं और संभावित मिलीभगत की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

पूर्व GLADA अधिकारी से पूछताछ के बाद कार्रवाई

बताया जा रहा है कि ED की कार्रवाई पंजाब कैडर की वरिष्ठ IAS अधिकारी कंवलप्रीत बराड़ से पूछताछ के बाद आगे बढ़ी है। बराड़ पूर्व में GLADA की चीफ एडमिनिस्ट्रेटर रह चुकी हैं।

उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों और संबंधित फाइलों की भी जांच की जा रही है। इसके बाद मौजूदा GLADA चीफ एडमिनिस्ट्रेटर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया है।

अन्य कंपनियों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में

मामले की जांच कथित तौर पर केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। ED इस प्रकरण से जुड़े अन्य भूमि आवंटन और कंपनियों के रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर रही है।

एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं औद्योगिक जमीन के मूल उद्देश्य में बदलाव के दौरान वित्तीय अनियमितता या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलू तो मौजूद नहीं हैं।

GLADA CA की ओर से आधिकारिक बयान नहीं

फिलहाल विकास हीरा की ओर से ED के समन और जांच को लेकर कोई सार्वजनिक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

15 सितंबर को उनकी पेशी के बाद जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों और बयानों से मामले में आगे की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। ED की जांच जारी है और इस स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों या आशंकाओं को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी और जांच एजेंसी से जुड़े दावों पर आधारित है। किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं।

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