पूर्व ED अफसर निरंजन सिंह अमृतपाल की पार्टी में होंगे शामिल, मजीठिया ड्रग्स केस में कर चुके हैं पूछताछ

पूर्व ED अधिकारी निरंजन सिंह अमृतपाल सिंह की पार्टी में होंगे शामिल, मजीठिया ड्रग्स केस की जांच से रहा है जुड़ाव

जालंधर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व अधिकारी निरंजन सिंह अब राजनीति में नई भूमिका की शुरुआत करने जा रहे हैं। वह बुधवार को खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल होंगे। निरंजन सिंह ने खुद इस बात की पुष्टि की है।

निरंजन सिंह का कहना है कि उन्होंने सरकारी सेवा से रिटायर हुए कई साल हो चुके हैं और पंजाब में लगातार नशे, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि कई राजनीतिक दल पंजाब से नशा खत्म करने का वादा कर चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित बदलाव नहीं आया। उनके मुताबिक अब पंजाब में बदलाव की जरूरत है।

मजीठिया से पूछताछ में भी रहे थे शामिल

निरंजन सिंह का नाम पंजाब के चर्चित ड्रग्स-मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच से जुड़ा रहा है। ED में जालंधर में तैनाती के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों पर काम किया। इसी दौरान 2014 में तत्कालीन पंजाब सरकार में मंत्री रहे बिक्रम सिंह मजीठिया से भी ड्रग्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ की गई थी।

मजीठिया से पूछताछ का संबंध जगदीश सिंह भोला से जुड़े ड्रग्स और मनी लॉन्ड्रिंग केस से था। भोला ने जांच के दौरान मजीठिया का नाम लिया था, हालांकि मजीठिया ने इन आरोपों से इनकार किया था।

पंजाब की सरकारों पर उठाए सवाल

राजनीति में शामिल होने के फैसले पर निरंजन सिंह ने कहा कि उनके पास दूसरे विकल्प नहीं थे। उन्होंने पंजाब की पिछली सरकारों पर भी सवाल उठाए और कहा कि अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में नशे की समस्या खत्म नहीं हो सकी।

उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में नशे के अलावा भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था भी गंभीर मुद्दे हैं। साथ ही उन्होंने अमृतपाल सिंह पर लगे आरोपों के संबंध में कहा कि कानून अपना काम करेगा और अंतिम फैसला अदालत करेगी।

निरंजन सिंह ने बताया कि अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह उनसे मुलाकात करने उनके घर पहुंचे थे और उन्होंने पार्टी में शामिल होने का आग्रह किया।

फिलहाल चुनाव लड़ने का इरादा नहीं

निरंजन सिंह ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनकी चुनाव लड़ने की कोई योजना नहीं है। अमृतपाल सिंह की राजनीतिक विचारधारा से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि वह कानून में विश्वास रखने वाले व्यक्ति हैं और उनका मानना है कि पार्टी भी कानून के दायरे में काम करने की बात करती है।

कौन हैं पूर्व ED अधिकारी निरंजन सिंह?

निरंजन सिंह लंबे समय तक ED के जालंधर कार्यालय में तैनात रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पंजाब से जुड़े कई मनी लॉन्ड्रिंग और FEMA मामलों की जांच की।

उनका नाम विशेष रूप से पंजाब के चर्चित ड्रग्स-मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में सामने आया। करीब 2012 से उन्होंने ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों की जांच पर काम करना शुरू किया। राजा कंडोला और अनूप काहलों से जुड़े मामलों की जांच आगे चलकर जगदीश सिंह भोला से जुड़े बड़े ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग केस तक पहुंची।

ED ने PMLA के तहत इस मामले में ड्रग कारोबार से जुड़े पैसों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच की थी।

भोला ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी कार्रवाई

इस मामले की जांच के दौरान बड़ी संख्या में आरोपियों को चार्जशीट किया गया। जांच एजेंसी ने कई आरोपियों की संपत्तियां भी अटैच की थीं।

लंबे समय तक चले इस मामले में वर्ष 2024 में विशेष अदालत ने जगदीश सिंह भोला समेत 17 आरोपियों को दोषी ठहराया। ट्रायल के दौरान कुछ आरोपियों की मौत हो गई, जबकि दो आरोपी घोषित अपराधी किए गए।

निरंजन सिंह इस केस की जांच से जुड़े प्रमुख अधिकारियों में शामिल रहे थे। बाद में पदोन्नति के बाद उन्होंने मामले की निगरानी की भूमिका भी निभाई।

मजीठिया से पूछताछ के बाद ट्रांसफर को लेकर विवाद

दिसंबर 2014 में बिक्रम सिंह मजीठिया से ED के जालंधर कार्यालय में पूछताछ हुई थी। इसके कुछ सप्ताह बाद जनवरी 2015 में निरंजन सिंह का जालंधर से कोलकाता ट्रांसफर कर दिया गया।

निरंजन सिंह ने इस ट्रांसफर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से अदालत में यह दलील दी गई थी कि मजीठिया से पूछताछ के बाद उनका ट्रांसफर किया गया।

मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद नवंबर 2015 में उनका ट्रांसफर रद्द कर दिया गया और उन्होंने जालंधर में रहकर संबंधित जांच से जुड़े काम को जारी रखा।

2016 में मजीठिया को फिर समन

2016 में निरंजन सिंह की ओर से मजीठिया को दोबारा समन भेजे जाने की जानकारी सामने आई। इस बार मजीठिया खुद पेश नहीं हुए और उन्होंने लिखित जवाब दिया।

इसी अवधि में निरंजन सिंह को असिस्टेंट डायरेक्टर से डिप्टी डायरेक्टर के पद पर पदोन्नत किया गया। इसके बाद जांच में उनकी भूमिका बदली और वह सीधे Investigating Officer के बजाय मामले की निगरानी से जुड़े रहे।

2017 में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद मामले की आगे की जांच असिस्टेंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई, जबकि निरंजन सिंह को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई।

2018 में ED छोड़ने का फैसला

अक्टूबर 2018 में निरंजन सिंह ने ED से इस्तीफा देने का फैसला किया था। उस समय उनकी सेवानिवृत्ति में करीब तीन साल बाकी थे। उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत कारण बताए थे और राजनीतिक दबाव की बात से इनकार किया था।

कुछ समय बाद उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया। इसके बाद वह ED में अपनी सेवा जारी रखते रहे और 31 मई 2021 को डिप्टी डायरेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए।

अब करीब पांच साल बाद निरंजन सिंह सक्रिय राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं और बुधवार को अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल होंगे।

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