बठिंडा में AAP विधायक और पूर्व मंत्री आमने-सामने, हाजिरी रजिस्टर को लेकर हुआ विवाद; समर्थकों ने लगाए नारे
बठिंडा: बठिंडा की नगर पंचायत मलूका में कर्मचारियों की हाजिरी को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक बलकार सिंह सिद्धू और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सिकंदर सिंह मलूका के बीच विवाद हो गया। हाजिरी रजिस्टर देखने को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करना पड़ा।
विधायक के कार्यालय से बाहर निकलने के दौरान सिकंदर सिंह मलूका के समर्थकों ने उनके खिलाफ नारेबाजी भी की।
कर्मचारियों की शिकायत पर नगर पंचायत पहुंचे विधायक
विधायक बलकार सिंह सिद्धू के अनुसार, कुछ आउटसोर्स कर्मचारियों ने उनसे शिकायत की थी कि नगर पंचायत में उनकी गैरहाजिरी दर्ज की गई है। कर्मचारियों की शिकायत पर वह मंगलवार को मलूका नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे।
विधायक का कहना है कि जब उन्होंने हाजिरी रजिस्टर देखने की कोशिश की तो रजिस्टर कार्यालय में मौजूद नहीं था। पूछताछ करने पर उन्हें बताया गया कि नगर पंचायत के प्रधान रजिस्टर को अपने घर ले गए हैं।
इसी दौरान पूर्व मंत्री सिकंदर सिंह मलूका को विवाद की जानकारी मिली और वह अपने समर्थकों के साथ नगर पंचायत कार्यालय पहुंच गए।
मलूका बोले- विधायक को कार्यालयी काम में दखल का अधिकार नहीं
पूर्व मंत्री सिकंदर सिंह मलूका ने विधायक की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया। उनका कहना था कि किसी भी कर्मचारी की गैरहाजिरी दर्ज नहीं की गई है।
मलूका ने कहा कि नगर पंचायत के प्रशासनिक और कार्यालयी कामकाज में विधायक को इस तरह सीधे हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। उनके मुताबिक, अगर किसी कर्मचारी की हाजिरी को लेकर कोई शिकायत है तो संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में इसकी जांच कराई जा सकती है।
उन्होंने विधायक पर नगर पंचायत के कामकाज में हस्तक्षेप करने और माहौल खराब करने का आरोप लगाया।
पुलिस ने संभाली स्थिति
दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ने के बाद पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने विधायक को वहां से जाने की सलाह दी, जिसके बाद वह कार्यालय से रवाना हुए।
विधायक के वापस लौटते समय मलूका समर्थकों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस की मौजूदगी में मामला आगे बढ़ने से रोका गया।
विधायक बोले- कर्मचारियों के हित में पहुंचे थे
विधायक बलकार सिंह सिद्धू ने अपने रुख का बचाव करते हुए कहा कि वह कर्मचारियों की शिकायत के आधार पर नगर पंचायत पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार कच्चे और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की दिशा में काम कर रही है।
उनका कहना है कि अगर किसी कर्मचारी की गैरहाजिरी दर्ज होती है तो इसका असर उसके नियमितीकरण से जुड़ी प्रक्रिया पर पड़ सकता है। विधायक ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और इसी मुद्दे को लेकर वह नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे थे।
फिलहाल हाजिरी रजिस्टर को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। विवाद के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

