पंजाब पुलिस के बर्खास्त AIG राजजीत सिंह ने किया सरेंडर, ड्रग्स मामले में करीब 6 साल से थे फरार
पटियाला: पंजाब पुलिस के बर्खास्त सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) राजजीत सिंह हुंदल ने लंबे समय से फरार रहने के बाद पटियाला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पंजाब के DGP गौरव यादव ने उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की। यह मामला कथित पुलिस-ड्रग तस्करी गठजोड़ और नशीले पदार्थों से जुड़े केसों में अनियमितताओं की जांच से संबंधित है।
इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह से जुड़े मामले में आया था नाम
राजजीत सिंह का नाम बर्खास्त पुलिस इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह से जुड़े ड्रग्स मामले की जांच के दौरान सामने आया था। वर्ष 2017 में इंद्रजीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर नशा तस्करों और कुछ पुलिस अधिकारियों के बीच संबंधों की पड़ताल शुरू की थी।
जांच में राजजीत सिंह की भूमिका को लेकर भी आरोप सामने आए। इन आरोपों के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई हुई और अप्रैल 2023 में उन्हें पंजाब पुलिस की सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वह इसके बाद से जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर थे।
50 से ज्यादा NDPS सैंपल फेल होने का मामला भी जांच में
इस प्रकरण में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 50 से अधिक नमूनों के जांच में फेल होने का मुद्दा भी सामने आया था। जांच एजेंसियों ने इस बात की पड़ताल की कि नमूनों की जांच और नशे से जुड़े मामलों की कार्रवाई में कोई जानबूझकर गड़बड़ी तो नहीं की गई थी।
राजजीत सिंह पर नशा तस्करों को कथित संरक्षण देने और अन्य अनियमितताओं से जुड़े आरोप भी लगे हैं। ये आरोप जांच का हिस्सा हैं; इन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष को अलग से देखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में सरेंडर की पेशकश के बाद कार्रवाई
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राजजीत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद 24 सितंबर 2026 को पटियाला में उनकी गिरफ्तारी की खबर सामने आई। इस घटनाक्रम के साथ लंबे समय से चल रही जांच में एक अहम मोड़ आया।
आगे की जांच में खुल सकते हैं नए तथ्य
जांच एजेंसियां इस मामले में कथित पुलिस-ड्रग तस्करी गठजोड़, नशे से जुड़े मामलों के रिकॉर्ड और अन्य आरोपों की पड़ताल कर रही हैं। राजजीत सिंह से पूछताछ के जरिए जांचकर्ता संबंधित मामलों में उनकी भूमिका और दूसरे संभावित संपर्कों के बारे में जानकारी जुटा सकते हैं।
मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

