पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर के खिलाफ ED की कार्रवाई, कोर्ट ने जारी किया नया प्रोडक्शन वारंट

पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर की ED के सामने पेशी की तैयारी, कोर्ट ने जारी किया नया प्रोडक्शन वारंट

चंडीगढ़: पंजाब पुलिस के निलंबित पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई आगे बढ़ रही है। PMLA अदालत ने भुल्लर को 9 अक्टूबर 2026 को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश करने के लिए नया प्रोडक्शन वारंट जारी किया है।

इससे पहले ED की अर्जी पर अदालत ने पेशी वारंट जारी किया था, लेकिन चंडीगढ़ में एक VVIP दौरे के चलते पुलिसकर्मियों की उपलब्धता नहीं होने के कारण उन्हें अदालत में पेश नहीं किया जा सका।

VVIP दौरे के कारण टल गई थी पेशी

अदालत ने बुड़ैल मॉडल जेल के अधीक्षक को भुल्लर को पेश करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था में पुलिसकर्मियों की तैनाती के कारण उनकी पेशी नहीं हो सकी। फिलहाल भुल्लर CBI के भ्रष्टाचार मामले में हिरासत में हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ED ने 6 नवंबर 2025 को इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए ECIR दर्ज की थी। अब एजेंसी कथित रिश्वत की रकम से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच आगे बढ़ाना चाहती है।

रिश्वत मांगने के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी

CBI ने हरचरण सिंह भुल्लर को 16 अक्टूबर 2025 को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया था। यह FIR आकाश बट्टा की शिकायत पर दर्ज की गई थी।

आरोप है कि रोपड़ रेंज में DIG के पद पर तैनात रहने के दौरान भुल्लर ने थाना सरहिंद में दर्ज एक FIR में राहत दिलाने के बदले कृष्णू शारदा के माध्यम से रिश्वत की मांग की थी। मामले में कथित तौर पर 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए बिचौलिए को गिरफ्तार किया गया था। उसी दिन भुल्लर की गिरफ्तारी भी हुई थी।

ED मामले में अभी तक हिरासत नहीं

अदालत के आदेश के मुताबिक, भुल्लर को CBI की FIR के संबंध में जेल में रखा गया है। ED के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें अभी तक एजेंसी की हिरासत में नहीं लिया गया था।

इसी सिलसिले में ED ने अदालत से प्रोडक्शन वारंट जारी करने का अनुरोध किया था। अदालत ने निर्देश दिया कि भुल्लर को 9 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश किया जाए। इसके लिए नया वारंट जारी किया गया।

मामले में आगे की कार्रवाई अदालत की प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के अनुसार होगी। भुल्लर पर लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

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