पंजाब के बहुचर्चित जयपाल भुल्लर डबल मर्डर केस में बड़ा फैसला, 8 दोषी करार; दो को उम्रकैद
लुधियाना: पंजाब के बहुचर्चित जयपाल भुल्लर जगराओं डबल मर्डर केस में लुधियाना की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सरू मेहता कौशिक की अदालत ने मामले में आठ आरोपियों को दोषी करार देते हुए दो आरोपियों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, अन्य छह दोषियों को अलग-अलग अवधि की कैद और जुर्माने की सजा दी गई है।
दो आरोपियों को उम्रकैद
अदालत ने गांव जोधां निवासी दर्शन सिंह और बाघा पुराना (मोगा) निवासी बलजिंदर सिंह उर्फ बब्बी को एएसआई भगवान सिंह और एएसआई दलविंदरजीत सिंह की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कठोर कारावास तथा ₹85,500 जुर्माने की सजा सुनाई।
अन्य दोषियों को भी मिली सजा
अदालत ने मामले में दोषी पाए गए अन्य आरोपियों को भी सजा सुनाई है।
- भरत कुमार को 5 वर्ष की कैद।
- गुरप्रीत सिंह उर्फ लक्की, सतपाल कौर, गगनदीप सिंह, नानक चंद और जसप्रीत सिंह को 3-3 वर्ष के कारावास के साथ ₹5,000 जुर्माने की सजा सुनाई गई।
शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को मुआवजा देने के निर्देश
अदालत ने आदेश दिया कि ड्यूटी के दौरान शहीद हुए दोनों पुलिस अधिकारियों के परिजनों को विक्टिम कम्पेनसेशन स्कीम के तहत उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए मामला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव को भेजा गया है।
73 गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर हुआ फैसला
वर्ष 2022 से चल रहे इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने 73 गवाहों के बयान दर्ज कराए। अदालत के समक्ष फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, हथियारों की बरामदगी और फर्जी दस्तावेज समेत कई महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश किए गए, जिनके आधार पर आरोप सिद्ध हुए।
क्या था पूरा मामला?
गौरतलब है कि 15 मई 2021 को जगराओं की नई अनाज मंडी में संदिग्ध वाहनों की जांच के दौरान एएसआई भगवान सिंह ने गैंगस्टर जयपाल भुल्लर को पहचान लिया था। इसके बाद आरोपियों ने पुलिस टीम पर कथित रूप से अंधाधुंध फायरिंग कर दी।
इस हमले में एएसआई भगवान सिंह और एएसआई दलविंदरजीत सिंह शहीद हो गए थे। घटना के बाद हमलावर पुलिस का सर्विस हथियार और मोबाइल फोन लेकर फरार हो गए थे।
मुख्य आरोपी गैंगस्टर जयपाल भुल्लर और उसका साथी जस्सी खरड़ वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल के कोलकाता में पंजाब पुलिस की कार्रवाई के दौरान मारे गए थे। बाद की जांच में विभिन्न राज्यों से हथियार, गोला-बारूद, फर्जी दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए थे, जिनके आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया।

