LPU हिंसा मामले में हाईकोर्ट सख्त, आरोपियों की गिरफ्तारी और भ्रामक पोस्ट हटाने के निर्देश
चंडीगढ़: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हुई हिंसा के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस की जांच पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रभावी कदम उठाने और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े खतरों को दूर करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि सोशल मीडिया पर दो विश्वविद्यालयों में कथित घटनाओं को लेकर अपुष्ट जानकारी फैलाई गई थी। इसके बाद बड़े पैमाने पर हिंसा और अशांति हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा के दौरान पुलिस की तीन गाड़ियों को आग लगा दी गई, कई पुलिसकर्मी घायल हुए और करीब 30 करोड़ रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा। राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा।
कथित रेप और छात्रा की आत्महत्या की खबर से फैली अशांति
मामला सोशल मीडिया पर फैले उस दावे से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने एक छात्रा के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसने आत्महत्या कर ली।
अदालत में पेश जानकारी के अनुसार, इन दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी अपुष्ट जानकारी के प्रसार के पीछे के उद्देश्य की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए। हालांकि, घटना से संबंधित सभी तथ्यों और सोशल मीडिया पोस्ट के स्रोत की पुष्टि जांच के आधार पर ही होगी।
ADGP साइबर क्राइम से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि काउंटर इंटेलिजेंस टीम जांच की प्रगति और तकनीकी डेटा की समीक्षा कर रही है। सरकार ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अतिरिक्त समय भी मांगा।
इसके बाद हाईकोर्ट ने काउंटर इंटेलिजेंस के IG के माध्यम से ADGP साइबर क्राइम मल्होत्रा का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने जांच की प्रगति और संबंधित तकनीकी पहलुओं पर स्पष्ट जानकारी मांगी है।
भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट हटाने पर जोर
हाईकोर्ट ने इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर प्रसारित भ्रामक पोस्ट के खिलाफ तत्काल कदम उठाने की जरूरत पर भी जोर दिया। अदालत का निर्देश है कि ऐसी सामग्री को हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए, जिससे दोबारा अशांति फैलने का खतरा कम हो।
पंजाब पुलिस को अगली सुनवाई पर जांच की प्रगति और की गई कार्रवाई का पूरा विवरण प्रस्तुत करना होगा।
27 अक्टूबर को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को प्रभावी जांच और आवश्यक कार्रवाई का एक और अवसर दिया है। अगली सुनवाई में जांच की स्थिति, आरोपियों की गिरफ्तारी और ऑनलाइन भ्रामक सामग्री के खिलाफ उठाए गए कदमों पर जानकारी पेश की जाएगी।
फिलहाल, मामले में अदालत के निर्देशों के अनुपालन और जांच की प्रगति पर नजर रहेगी।

