Saudi Arabia News: पठानकोट से जुड़े अमृतधारी सिख युवक को मौत की सजा, परिवार ने सरकार से लगाई मदद की गुहार
पठानकोट: पठानकोट से संबंधित एक अमृतधारी सिख युवक को सऊदी अरब की अदालत से मौत की सजा सुनाए जाने की खबर सामने आई है। मामले की जानकारी मिलने के बाद युवक के परिवार में चिंता और दुख का माहौल है।
परिवार का दावा है कि युवक को करीब तीन साल पहले दुबई-सऊदी अरब सीमा से जुड़े एक ट्रक में कथित तौर पर ड्रग्स बरामद होने के मामले में दोषी ठहराया गया। परिवार का कहना है कि युवक का नशीले पदार्थों की तस्करी से कोई सीधा संबंध नहीं था और उसे कथित तौर पर साजिश के तहत मामले में फंसाया गया।
परिवार ने आरोपों से किया इनकार
परिवार के मुताबिक, जिस व्यक्ति पर नशा तस्करी से जुड़े होने का आरोप था, वह उनका बेटा नहीं बल्कि कोई अन्य व्यक्ति था। परिवार का कहना है कि युवक को मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद उन्होंने लगातार उसके पक्ष में आवाज उठाई है।
मौत की सजा की जानकारी सामने आने के बाद युवक के बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और बच्चों की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। परिवार अब कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर मदद की उम्मीद कर रहा है।
केंद्र और पंजाब सरकार से हस्तक्षेप की मांग
परिवार ने भारत सरकार और पंजाब सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि सरकार सऊदी अरब के संबंधित अधिकारियों के साथ कूटनीतिक स्तर पर संपर्क करे और युवक को उपलब्ध सभी संभावित कानूनी मदद दिलाने का प्रयास करे।
परिवार की मांग है कि मौत की सजा पर अमल से पहले मामले के सभी तथ्यों और युवक की कथित भूमिका की दोबारा जांच कराई जाए।
बच्चों को पिता की वापसी का इंतजार
परिवार की ओर से साझा की गई तस्वीरों में बच्चों और परिजनों की भावुक स्थिति नजर आती है। परिवार का कहना है कि बच्चों को अब भी अपने पिता की वापसी की उम्मीद है।
परिजनों ने सरकार से अपील की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द से जल्द कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जाएं।
मामले में परिवार के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी
फिलहाल सामने आई जानकारी मुख्य रूप से परिवार के आरोपों और अपील पर आधारित है। युवक के खिलाफ सऊदी अरब की अदालत में हुई कार्यवाही, आरोपों के विस्तृत आधार और फैसले की पूरी जानकारी स्वतंत्र रूप से उपलब्ध नहीं है।
इसलिए परिवार द्वारा युवक को निर्दोष बताए जाने के दावे को अंतिम न्यायिक तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। मामले में अदालत के रिकॉर्ड और आधिकारिक कूटनीतिक जानकारी से आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

