पंजाब के 17 जिलों में किसान आंदोलन की तैयारी, 8 जून को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान
पंजाब डेस्क: देशभर के किसान संगठनों ने एक बार फिर सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है। इसी कड़ी में 8 जून को पंजाब सहित कई राज्यों में व्यापक विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पंजाब के करीब 17 जिलों में इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और ग्रामीण इलाकों में बैठकों का दौर लगातार जारी है।
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने जानकारी देते हुए बताया कि हाल ही में ऑल इंडिया किसान मजदूर मोर्चा की ग्वालियर में हुई राष्ट्रीय बैठक में इस आंदोलन की रणनीति तय की गई थी। इसके तहत पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में एक साथ सरकारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
17 जिलों में पुतला दहन की तैयारी
किसान संगठनों के अनुसार पंजाब के 17 जिलों में विरोध कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। विभिन्न स्थानों पर केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किए जाएंगे तथा पुतले फूंके जाएंगे। किसान नेताओं का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
यूरिया खाद की कमी बना बड़ा मुद्दा
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि इस समय किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या यूरिया खाद की कमी है। कई क्षेत्रों में किसानों को यूरिया उपलब्ध नहीं हो रही, जबकि कुछ जगहों पर उन्हें अन्य महंगे कृषि उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई इलाकों में खाद की कालाबाजारी हो रही है, जिससे किसानों की लागत बढ़ रही है और फसलों पर असर पड़ रहा है।
बढ़ती खेती लागत पर भी नाराजगी
सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में अपेक्षित राहत नहीं दी गई। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा असर कृषि कार्यों, सिंचाई और परिवहन लागत पर पड़ रहा है।
भूमि अधिग्रहण और व्यापार समझौतों पर सवाल
किसान संगठनों ने भारत माला परियोजना सहित विभिन्न विकास योजनाओं के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में किसानों की जमीनें जबरन अधिग्रहित की जा रही हैं।
इसके अलावा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और हाल के कुछ नीतिगत फैसलों को भी किसान संगठनों ने कृषि क्षेत्र के लिए नुकसानदायक बताया है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकारों ने खाद संकट, बढ़ती लागत और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
उन्होंने किसानों और मजदूरों से अपील की है कि वे 8 जून को आयोजित होने वाले विरोध कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करें और किसान हितों की रक्षा के लिए एकजुटता दिखाएं।
पंजाब के 17 जिलों में 8 जून को किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और पुतला दहन का ऐलान किया है। यूरिया खाद की कमी, बढ़ती खेती लागत और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई है।

