पंजाब-हरियाणा और हिमाचल में बनी 71 दवाओं के सैंपल फेल, कंपनियों को नोटिस
नालागढ़: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की अगस्त महीने की ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में देशभर में निर्मित कई दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में तैयार की गई 71 दवाओं के नमूने फेल पाए गए हैं।
इन दवाओं में बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले सिरप के अलावा एंटीबायोटिक, बुखार और खांसी की दवाएं, हार्ट व किडनी से संबंधित दवाएं, आंखों की दवाएं, इंजेक्शन और विटामिन उत्पाद शामिल हैं।
देशभर में 221 दवाओं के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे
CDSCO के अगस्त ड्रग अलर्ट में देश के अलग-अलग राज्यों में बनी कुल 221 दवाओं के नमूनों के गुणवत्ता परीक्षण में असफल रहने की जानकारी दी गई है। इनमें 191 नमूनों की जांच राज्य स्तर की ड्रग टेस्टिंग लैब में, जबकि 29 नमूनों का परीक्षण केंद्रीय प्रयोगशालाओं में किया गया।
राज्यवार आंकड़ों में हिमाचल प्रदेश की 63 दवाओं के नमूने फेल पाए गए। इसके अलावा उत्तराखंड की 39, गुजरात की 17, महाराष्ट्र की 16, मध्य प्रदेश की 12, तमिलनाडु और हरियाणा की 11-11, सिक्किम और उत्तर प्रदेश की 9-9 तथा पंजाब की 8 दवाओं के नमूने गुणवत्ता जांच में असफल रहे।
हिमाचल के कई औद्योगिक क्षेत्रों की कंपनियां शामिल
हिमाचल प्रदेश में जिन दवाओं के नमूने फेल हुए हैं, उनका निर्माण बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा स्थित दवा इकाइयों में होने की जानकारी सामने आई है।
बड़ी संख्या में नमूनों के फेल होने के बाद संबंधित दवा कंपनियों की निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया जांच के दायरे में आ गई है।
कंपनियों को कारण बताओ नोटिस
हिमाचल के स्टेट ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर के अनुसार, गुणवत्ता परीक्षण में असफल रहे नमूनों से संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
संबंधित बैचों की बिक्री और सप्लाई रोकने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक बाजार में भेजे जा चुके स्टॉक को वापस मंगाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। कंपनियों से मामले में जवाब मांगा गया है और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
CDSCO और राज्य औषधि नियंत्रण विभाग की ऐसी जांच का उद्देश्य दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी करना और निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरने वाले उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई करना है।

