CM भगवंत मान ने विधानसभा में कहा- पंजाब से मुफ्त पानी लेकर राजस्थान आगे बेच रहा है; रॉयल्टी के लिए अदालत से सड़कों तक लड़ेंगे, विशेष सत्र में सभी प्रस्ताव पारित
राजस्थान से पानी की रॉयल्टी मांगने का प्रस्ताव पारित
पंजाब और राजस्थान के बीच पानी की रॉयल्टी को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजस्थान से पानी के इस्तेमाल के बदले रॉयल्टी की मांग उठाई।
CM मान ने कहा कि पंजाब का पानी मुफ्त में लेकर आगे बेचा जा रहा है। उनके मुताबिक, जिस तरह किसी कारोबार में कच्चा माल लेकर उससे उत्पाद तैयार कर बेचा जाता है, उसी तरह राजस्थान पंजाब से पानी लेकर उसका इस्तेमाल कर रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पंजाब का करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी पर हक बनता है।
उन्होंने सिंचाई मंत्री की ओर से पेश प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पंजाब अपने पानी की एक-एक बूंद के अधिकार के लिए आवाज उठाएगा। जरूरत पड़ने पर सरकार अदालत से लेकर सड़कों तक कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ेगी।
सिंचाई मंत्री ने भी उठाया पंजाब के जल अधिकारों का मुद्दा
इससे पहले पंजाब के सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। इसमें कहा गया कि सतलुज, रावी और ब्यास नदियां राजस्थान से होकर नहीं गुजरतीं, इसलिए पंजाब सरकार के अनुसार राजस्थान रिपेरियन राज्य नहीं है।
प्रस्ताव में दावा किया गया कि इसके बावजूद दशकों से पंजाब का पानी राजस्थान को बिना भुगतान के दिया जा रहा है। पंजाब सरकार का तर्क है कि राजस्थान इस पानी का इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ हासिल करता है, जबकि पंजाब खुद जल संकट का सामना कर रहा है।
प्रस्ताव में मांग की गई कि राजस्थान सरकार पंजाब को दिए जाने वाले पानी की कीमत चुकाए। इसके साथ ही केंद्र सरकार से भी अनुरोध किया गया कि वह भविष्य में राजस्थान को दिए जाने वाले पानी के बदले पंजाब को वार्षिक भुगतान सुनिश्चित करे।
विशेष सत्र के अंतिम दिन पेश किए गए सभी प्रस्ताव पारित होने के बाद विधानसभा का सत्र समाप्त हो गया।
राजस्थान सरकार पहले ही मांग खारिज कर चुकी
पंजाब की ओर से पानी की रॉयल्टी का मुद्दा पहले भी उठाया जा चुका है। इस साल 19 मार्च को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी की मांग करते हुए पानी रोकने की चेतावनी दी थी।
अगले दिन, 20 मार्च को राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने पंजाब की मांग को खारिज कर दिया था। पंजाब सरकार की ओर से पत्र लिखकर भी रॉयल्टी मांगी गई थी, लेकिन राजस्थान सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
राजस्थान के मंत्री का तर्क था कि किसी एक राज्य की ओर से दूसरे राज्य के पानी पर रॉयल्टी या व्यावसायिक अधिकार का दावा करना असंवैधानिक है और संविधान की मूल भावना तथा स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
इस तरह दोनों राज्यों के बीच पानी के अधिकार और भुगतान को लेकर मतभेद पहले से बने हुए हैं।
ब्रिटिश शासन के समय से जुड़ा है विवाद
पंजाब सरकार के दावे के अनुसार, राजस्थान को पानी देने और उसके बदले भुगतान का विवाद ब्रिटिश शासन के दौर से जुड़ा है।
4 सितंबर 1920 को शिमला में ब्रिटिश सरकार, बहावलपुर और बीकानेर रियासतों के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत बीकानेर रियासत को फिरोजपुर हेडवर्क्स से गंगनहर के माध्यम से सतलुज नदी का पानी दिया जाना था। इसके बदले रियासत की ओर से रॉयल्टी का भुगतान किया जाता था।
पंजाब सरकार का कहना है कि राजस्थान की ओर से 1960 तक पानी की रॉयल्टी दी जाती रही, लेकिन इसके बाद भुगतान बंद कर दिया गया। इसी ऐतिहासिक दावे के आधार पर पंजाब अब बकाया राशि की मांग कर रहा है।
1961 से 2025 तक के लिए ₹1.44 लाख करोड़ का दावा
पंजाब सरकार ने वर्ष 1961 से 2025 तक पानी के इस्तेमाल के बदले राजस्थान से कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी मांगी है।
सरकार की गणना में पुरानी दरों के साथ 8 प्रतिशत ब्याज भी शामिल बताया गया है। हालांकि, यह राशि पंजाब सरकार का दावा है और राजस्थान पहले ही इसे खारिज कर चुका है। इसलिए भुगतान का सवाल दोनों राज्यों के बीच आगे कानूनी और नीतिगत बहस का विषय बन सकता है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया है कि पंजाब अपने जल संसाधनों के अधिकारों को लेकर पीछे नहीं हटेगा और रॉयल्टी की मांग को आगे बढ़ाएगा।

