पंजाब में पराली जलाने के 59 मामले, अमृतसर पहले नंबर पर; तरनतारन दूसरे स्थान पर
अमृतसर: पंजाब में धान की कटाई शुरू होते ही पराली जलाने के मामले सामने आने लगे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो सप्ताह में अमृतसर जिले में पराली जलाने की 59 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो राज्य के जिलों में सबसे अधिक हैं। तरनतारन 28 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है। इस बीच, प्रशासन किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान चला रहा है, लेकिन खेतों में पराली जलाने की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
पराली जलाने के मामलों में जिलों की स्थिति
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पंजाब के विभिन्न जिलों में पराली जलाने के मामले इस प्रकार सामने आए हैं:
- अमृतसर: 59 मामले
- तरनतारन: 28 मामले
- फिरोजपुर: 5 मामले
- गुरदासपुर: 4 मामले
- मोगा: 2 मामले
- पटियाला: 2 मामले
- संगरूर: 2 मामले
ये आंकड़े रिपोर्ट में बताए गए पिछले दो सप्ताह की स्थिति पर आधारित हैं। कटाई का सीजन आगे बढ़ने के साथ इनकी संख्या में बदलाव हो सकता है।
जागरूकता अभियान के बावजूद नहीं थम रही घटनाएं
अमृतसर जिला प्रशासन की ओर से जागरूकता वैन चलाई जा रही हैं। इनके माध्यम से किसानों से पराली न जलाने और फसल के अवशेषों को खेतों में मिलाने की अपील की जा रही है।
ऐसा करने से धुएं के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमृतसर में सामने आए 59 मामलों में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। हालांकि, संबंधित किसानों को नोटिस जारी करने और कुल एक लाख रुपये के जुर्माने की जानकारी दी गई है। पिछले साल प्रशासन ने पराली जलाने के मामलों में कई एफआईआर दर्ज करवाई थीं।
केंद्र सरकार ने बनाया फ्लाइंग स्क्वॉड
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से फ्लाइंग स्क्वॉड गठित किए जाने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को अपने-अपने जिलों में पराली जलाने की घटनाओं की दैनिक रिपोर्ट देनी होगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य घटनाओं पर नजर रखना और कार्रवाई की स्थिति की समीक्षा करना है।
प्रशासनिक व्यस्तता भी बनी चुनौती
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एसआईआर और अन्य सरकारी ड्यूटियों में अधिकारियों तथा कर्मचारियों की व्यस्तता के कारण पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी प्रभावित हो सकती है। आने वाले समय में जनगणना संबंधी काम शुरू होने की संभावना भी जताई गई है।
हालांकि, प्रशासनिक व्यस्तता और कार्रवाई में कमी के बीच संबंध को लेकर स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अमृतसर में AQI 155 से 208 के बीच
रिपोर्ट के मुताबिक, अमृतसर के अलग-अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 155 से 208 के बीच दर्ज किया गया है। ऐसे स्तर पर हवा की गुणवत्ता संवेदनशील लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी परेशानी पैदा कर सकती है। पराली के धुएं के अलावा मौसम, वाहनों और अन्य प्रदूषण स्रोतों का भी AQI पर असर पड़ता है।
पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने पर वायु गुणवत्ता और प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसानों को फसल अवशेषों के प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों को अपनाने और प्रशासन को नियमों के पालन की निगरानी मजबूत करने की जरूरत है।

