लुधियाना में स्टेज पर भड़के रंजीत बावा, फैन ने ‘सरकारें’ गाने की मांग की तो बोले—‘परसों ही तारीख भुगतकर आया हूं’
खन्ना के दशहरा मेले में लाइव शो के दौरान गायक ने जताई नाराजगी; बोले—2016 में नशे के खिलाफ आवाज उठाई, केसों का सामना अकेले किया
लुधियाना। पंजाबी गायक रंजीत बावा लुधियाना जिले के खन्ना में आयोजित दशहरा मेले के दौरान एक प्रशंसक की फरमाइश पर नाराज हो गए। लाइव शो के दौरान एक फैन ने उनसे विवादित गाना ‘सरकारें’ गाने की मांग की। इस पर बावा ने मंच से ही अपनी बात रखी और कहा कि जब उनके खिलाफ मामले दर्ज हुए, तब कोई उनके साथ खड़ा नहीं हुआ। उन्होंने साफ किया कि वह अब यह गाना नहीं गाएंगे।
गायक ने अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए कहा कि किसी मुद्दे पर आवाज उठाना आसान है, लेकिन उसके बाद कानूनी कार्रवाई का सामना संबंधित व्यक्ति को करना पड़ता है। उन्होंने प्रशंसकों से अपील की कि वे केवल गाने की मांग करने के बजाय अपने आसपास नशे की समस्या के खिलाफ भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
2016 में नशे के खिलाफ आवाज उठाने का किया जिक्र
रंजीत बावा ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2016 में नशे के मुद्दे पर आवाज उठाई थी, जब इस विषय पर खुलकर बोलना आसान नहीं था। उन्होंने दावा किया कि उस समय उन्हें सुबह करीब 7:30 बजे घर से ले जाया गया था और इसके बाद उन्हें कानूनी मामलों का सामना करना पड़ा।
गायक ने कहा कि उस मुश्किल समय में उन्हें किसी का साथ नहीं मिला और उन्होंने अकेले ही परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने यह भी बताया कि मामला अब तक चल रहा है और हाल ही में उन्हें अदालत में पेशी के लिए जाना पड़ा था।
‘तुम घर चले जाओगे, भुगतना मुझे पड़ेगा’
गाने की मांग करने वाले प्रशंसक को जवाब देते हुए बावा ने कहा कि केवल गाना सुनकर घर लौट जाने से नशे की समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने लोगों से अपने शहरों और गांवों में नशे की बिक्री पर ध्यान देने तथा इसे रोकने के लिए जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
गायक ने कहा कि मंच से नशे के खिलाफ आवाज उठाने की मांग करना आसान है, लेकिन जब कलाकार को इसके कारण कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, तो लोग अक्सर उसके साथ खड़े नहीं होते।
उन्होंने कहा कि प्रशंसक कार्यक्रम के बाद अपने घर चले जाते हैं, जबकि विवाद और कानूनी कार्रवाई का सामना उन्हें करना पड़ता है।
‘हम किसी सरकार के चमचे नहीं हैं’
रंजीत बावा ने उन लोगों को भी जवाब दिया, जो उन पर सरकार से डरने का आरोप लगाते हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी सरकार से नहीं डरते, लेकिन कुछ मामलों में कानून और कानूनी प्रक्रिया का ध्यान रखना जरूरी होता है।
गायक ने कहा कि वह अपनी कमाई से जीवन चलाते हैं और किसी सरकार से अनुदान नहीं लेते। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी कमाई से उनके साथ काम करने वाले करीब 40 से 50 लोगों का गुजारा होता है।
बावा ने प्रशंसकों से कहा कि बार-बार ऐसे सवाल करके उन्हें उकसाने की कोशिश न की जाए।
‘सरकारें’ गाने की फरमाइश से शुरू हुआ विवाद
खन्ना में दशहरा मेले के दौरान हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पंजाबी संगीत, नशे के मुद्दे और कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी पर चर्चा छेड़ दी है। रंजीत बावा की नाराजगी का मुख्य कारण उनके मुताबिक, पुराने मामलों में साथ नहीं मिलने और कानूनी परेशानियों का सामना करना रहा।
गायक ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि नशे के खिलाफ केवल गीतों और नारों तक सीमित रहने के बजाय लोगों को अपने स्तर पर भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

