मानसा दलजीत सिंह मौत मामले में हाईकोर्ट सख्त, PGI चंडीगढ़ में दोबारा पोस्टमॉर्टम के आदेश
पंजाब के मानसा जिले के भम्मे कलां गांव के 35 वर्षीय दलजीत सिंह उर्फ जीता की संदिग्ध मौत के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने दलजीत के शव का चंडीगढ़ स्थित PGI में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए शव 15 घंटे के भीतर PGI प्रशासन को सौंपने को कहा गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट 4 नवंबर को दोपहर 1:45 बजे अदालत के सामने पेश करनी होगी।
हाईकोर्ट ने पोस्टमॉर्टम के बाद दलजीत का अंतिम संस्कार चंडीगढ़ के सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में पुलिस सुरक्षा के बीच कराने का आदेश भी दिया है। अदालत के निर्देशानुसार अंतिम संस्कार में केवल परिवार के सदस्य और करीबी लोग शामिल हो सकेंगे। किसी भी राजनेता या बाहरी व्यक्ति को वहां पहुंचने की अनुमति नहीं होगी।
पंजाब और चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस से पूछा- शव कब्जे में लेने से क्या हासिल हुआ?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से सवाल किया कि पुलिस ने दलजीत का शव परिवार से अपने कब्जे में क्यों लिया और ऐसा करने से उसे क्या हासिल हुआ? अदालत ने टिप्पणी की कि प्रत्येक मृत व्यक्ति को सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार का अधिकार है।
पंजाब सरकार की ओर से दलील दी गई कि मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की मौत के बाद लगातार प्रदर्शन हो रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग पर झोटा मामले की जांच CBI को सौंप दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद धरना जारी था।
सरकार ने बताया कि दलजीत के शव को भी प्रदर्शन स्थल पर ले जाया जा रहा था, जहां लक्खा सिधाणा और भाना सिद्धू समेत कई लोग मौजूद थे। सरकार के अनुसार, वहां कानून-व्यवस्था बिगड़ने और हिंसा की आशंका के चलते पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लिया था।
AIIMS बठिंडा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने AIIMS बठिंडा में किए गए पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट अदालत में पेश की। रिपोर्ट में दलजीत के शरीर पर चोटों के निशान होने की बात सामने आई।
इस पर हाईकोर्ट ने सवाल किया कि ये चोटें दलजीत को मौत से पहले लगी थीं या मौत के बाद आईं। चोटों की वास्तविक स्थिति और मौत के कारणों को स्पष्ट करने के लिए अदालत ने PGI चंडीगढ़ में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश दिया।
27 अक्टूबर को खेतों में मिला था दलजीत का शव
दलजीत सिंह का शव 27 अक्टूबर की सुबह मानसा जिले के रामानंदी गांव के पास खेतों में मिला था। पुलिस ने शुरुआती जांच में हत्या की आशंका जताई थी। दलजीत के पिता जरनैल सिंह की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
दूसरी ओर, परिवार का आरोप है कि दलजीत की मौत नशे की ओवरडोज के कारण हुई। उसकी पत्नी परमजीत कौर के मुताबिक, दलजीत पहले नशे का आदी था, लेकिन उसने करीब तीन सप्ताह पहले नशा छोड़ दिया था। परिवार क्षेत्र में नशे की बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।
शव को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में हुआ था टकराव
27 अक्टूबर को परिवार और ग्रामीण दलजीत का शव लेकर मानसा में चल रहे झोटा इंसाफ मोर्चे में शामिल होने जा रहे थे। रामदित्तेवाला चौक के पास पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हो गया।
परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया और उनकी सहमति के बिना शव को जबरन कब्जे में ले लिया। इसके बाद पुलिस शव को AIIMS बठिंडा ले गई, जहां 28 अक्टूबर को पोस्टमॉर्टम किया गया।
इस घटना के दौरान पुलिस टीम पर हमले के आरोप में हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं के तहत अलग मामला भी दर्ज किया गया था। पुलिस का दावा था कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया था।
बहन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांगी थी CBI जांच
दलजीत की बहन अमरजीत कौर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें मामले की CBI जांच, PGI चंडीगढ़ के डॉक्टरों के बोर्ड से दोबारा पोस्टमॉर्टम और परिवार को सुरक्षा देने की मांग की गई थी।
याचिका में पुलिस पर परिवार की सहमति के बिना शव कब्जे में लेने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग करने के आरोप लगाए गए थे।
दलजीत की पत्नी परमजीत कौर, मां शिंदरपाल कौर और बहन अमरजीत कौर मानसा में चल रहे झोटा इंसाफ मोर्चे में शामिल हैं, जबकि उनके पिता जरनैल सिंह गांव में रह रहे हैं। परिवार ने पोस्टमॉर्टम और अन्य मांगों को लेकर शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था।
इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भी संज्ञान ले चुका है। आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव और DGP से घटना के संबंध में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद PGI में होने वाला दूसरा पोस्टमॉर्टम मामले की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

