पंजाब में प्रेगाबालिन की बिक्री बंद करेंगे केमिस्ट, पुलिस रेड के विरोध में बड़ा फैसला

पंजाब में मेडिकल स्टोरों पर नहीं मिलेगी प्रेगाबालिन! केमिस्टों ने बिक्री बंद करने का किया ऐलान, स्टॉक कंपनियों को लौटाएंगे

पंजाब में दवा विक्रेताओं और पुलिस-स्वास्थ्य विभाग के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। पंजाब केमिस्ट्स एसोसिएशन ने प्रेगाबालिन समेत आदत डालने वाली दवाइयों की बिक्री बंद करने का ऐलान किया है। एसोसिएशन के फैसले के मुताबिक, रिटेल मेडिकल स्टोरों पर बचा हुआ स्टॉक होलसेल विक्रेताओं को लौटाया जाएगा, जबकि होलसेलर संबंधित कंपनियों को दवाइयां वापस भेजेंगे।

केमिस्ट संगठनों का कहना है कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जा रही छापेमारी और कार्रवाई के विरोध में यह कदम उठाया गया है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि चेकिंग के नाम पर निर्दोष मेडिकल स्टोर संचालकों को परेशान किया जा रहा है। साथ ही सरकार से मांग की गई है कि मरीजों के लिए इन दवाइयों की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

पंजाब के 23 जिलों के केमिस्ट संगठनों की बैठक में फैसला

पंजाब केमिस्ट्स एसोसिएशन के प्रधान सुरिंदर दुग्गल और महासचिव जीएस चावला के नेतृत्व में प्रदेश के सभी 23 जिलों के प्रधानों और सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की गई।

बैठक में प्रदेशभर के केमिस्टों तक बिक्री बंद करने का फैसला पहुंचाने पर सहमति बनी। संगठन के मुताबिक, ट्रामाडोल, प्रेगाबालिन और साइकोट्रोपिक एवं नारकोटिक श्रेणी की दवाइयों की बिक्री से दूरी बनाने का निर्णय लिया गया है।

यह फैसला जिला होलसेल एवं रिटेल केमिस्ट एसोसिएशन और पठानकोट होलसेल केमिस्ट एसोसिएशन की रविवार को हुई अलग-अलग बैठकों में भी समर्थित किया गया।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की रेड के विरोध में फैसला

जिला होलसेल एवं रिटेल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सूद, महासचिव दीपिंदर अरोड़ा और पठानकोट होलसेल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश महाजन बब्बा ने कहा कि पुलिस तथा स्वास्थ्य विभाग की कथित अनावश्यक छापेमारी और उत्पीड़न के विरोध में यह कदम उठाया गया है।

एसोसिएशन के नेताओं का आरोप है कि जांच के नाम पर मेडिकल स्टोरों को सील किया जा रहा है। इससे दवा कारोबारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है।

‘केमिस्ट अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे हैं’

पंजाब केमिस्ट्स एसोसिएशन के महासचिव जीएस चावला ने कहा कि मौजूदा कार्रवाई से केमिस्टों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि नशे के खिलाफ अभियान के दौरान निर्दोष दवा विक्रेताओं को भी संदेह की नजर से देखा जा रहा है।

चावला के मुताबिक, संगठन नहीं चाहता कि किसी भी निर्दोष मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ कार्रवाई हो। उन्होंने सरकार से अपील की कि दवाइयों की बिक्री और वितरण को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।

एसोसिएशन ने यह सुझाव भी दिया कि संबंधित दवाइयां केवल प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर विचार किया जाए। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से किसी निर्णय की जानकारी नहीं दी गई है।

प्रेगाबालिन समेत कई दवाइयों का स्टॉक लौटाएंगे केमिस्ट

पठानकोट होलसेल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश महाजन बब्बा ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि रिटेल केमिस्ट प्रेगाबालिन और अन्य संबंधित दवाइयों का स्टॉक होलसेल विक्रेताओं को वापस करेंगे।

इसके बाद होलसेल विक्रेता बची हुई दवाइयां कंपनियों को लौटाएंगे। एसोसिएशन ने सरकार से यह भी मांग की कि जिन मरीजों को डॉक्टरों की सलाह पर इन दवाइयों की जरूरत पड़ती है, उनके लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

कोविड और बाढ़ के दौरान सहयोग का दिया हवाला

केमिस्ट संगठनों ने अपने योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि कोविड महामारी के दौरान दवा विक्रेताओं ने जोखिम उठाकर मरीजों तक दवाइयां पहुंचाईं। पंजाब में बाढ़ के समय भी विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाकर लोगों को दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।

एसोसिएशन के नेताओं के मुताबिक, इन प्रयासों के जरिए छह लाख से अधिक मरीजों तक दवाइयां पहुंचाई गईं। उन्होंने कहा कि संगठन ने सरकार के ‘रंगला पंजाब’ कार्यक्रम और स्वास्थ्य विभाग को भी सहयोग दिया है।

नेताओं ने आरोप लगाया कि झोटा मामले के बाद प्रदेश के करीब 30 हजार दवा कारोबारियों को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। एसोसिएशन ने इस मामले की निंदा करते हुए कहा कि किसी घटना के आधार पर सभी दवा विक्रेताओं को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

पठानकोट इकाई ने भी फैसले का समर्थन किया

पठानकोट जिला होलसेल एवं रिटेल केमिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सूद और महासचिव दीपिंदर अरोड़ा ने कहा कि दवा विक्रेता प्रशासन के साथ मिलकर काम करने और अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं।

हालांकि, उनका आरोप है कि निर्दोष कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के कारण संगठन को बिक्री बंद करने जैसा कदम उठाना पड़ा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और अनावश्यक छापेमारी पर रोक लगाई जाए।

नशे के खिलाफ अभियान का समर्थन, लेकिन कार्रवाई पर सवाल

केमिस्ट एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वह नशे के खिलाफ सरकार की मुहिम का समर्थन करती है। हालांकि, संगठन का कहना है कि किसी भी मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ कार्रवाई ठोस आधार और सबूतों के आधार पर होनी चाहिए।

एसोसिएशन ने सरकार से दवा कारोबारियों को सुरक्षित माहौल देने, अनावश्यक छापेमारी रोकने और मरीजों के लिए जरूरी दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।

महत्वपूर्ण: प्रेगाबालिन समेत कई दवाइयां डॉक्टरों की सलाह पर अलग-अलग चिकित्सकीय स्थितियों में इस्तेमाल होती हैं। मरीज अपनी निर्धारित दवा खुद से बंद न करें और किसी भी बदलाव से पहले डॉक्टर से सलाह लें। केमिस्ट संगठनों की बिक्री रोकने की घोषणा के बाद वास्तविक उपलब्धता और वैकल्पिक व्यवस्था की स्थिति संबंधित प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगी।

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