पंजाब में प्रदूषण का रिकॉर्ड स्तर: बरनाला का AQI 1244 तक पहुंचा, बठिंडा में भी 1124 दर्ज
दिवाली से पहले पंजाब में वायु प्रदूषण ने चिंताजनक स्तर छू लिया है। 3 नवंबर की सुबह राज्य के कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 1000 के पार दर्ज किया गया। निजी और वैश्विक रियल-टाइम एयर क्वालिटी ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म के आंकड़ों के अनुसार, बरनाला में AQI 1244, तलवंडी साबो में 1139 और बठिंडा में 1124 तक पहुंच गया। ये रीडिंग बेहद खराब वायु गुणवत्ता की स्थिति की ओर इशारा करती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन आंकड़ों के साथ बरनाला उस समय देश के सबसे प्रदूषित स्थानों में शामिल रहा। इससे पहले 2024 में दिल्ली में भी निजी वैश्विक ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म पर 1785 तक का AQI दर्ज किए जाने का दावा किया गया था।
हरियाणा के शहरों में भी प्रदूषण का स्तर बेहद ऊंचा
पंजाब के साथ पड़ोसी हरियाणा में भी वायु प्रदूषण का असर दिखाई दिया। उपलब्ध रियल-टाइम आंकड़ों के अनुसार, सिरसा में AQI 848 और रोहतक में 847 दर्ज किया गया। लगातार बढ़ते प्रदूषण ने क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
प्रदूषण में अचानक आई तेजी के पीछे मुख्य रूप से पराली जलाने की घटनाओं को जिम्मेदार बताया जा रहा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पराली जलाने के मामलों में बढ़ोतरी को लेकर गुरदासपुर के डिप्टी कमिश्नर और एसएसपी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।
AQI बढ़ने के पीछे चार प्रमुख वजहें
1. पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी
धान की कटाई का सीजन अपने चरम पर है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पंजाब के मालवा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में तेजी आई है। अगली फसल की बुआई के लिए खेत जल्द खाली करने के दबाव में कुछ किसान पराली को आग लगा रहे हैं। इससे वातावरण में धुआं और सूक्ष्म प्रदूषक कण बढ़ रहे हैं।
2. हवा की रफ्तार कम होना
इस दौरान उत्तर-पश्चिमी हवाओं की गति धीमी रहने से प्रदूषक कण वातावरण में फैल नहीं पा रहे। हवा की कम रफ्तार के कारण धुआं और धूल स्थानीय इलाकों में ही जमा हो जाते हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।
3. तापमान में गिरावट और थर्मल इन्वर्जन
नवंबर की शुरुआत के साथ तापमान में गिरावट भी प्रदूषण बढ़ने की एक वजह बताई जा रही है। थर्मल इन्वर्जन की स्थिति में ठंडी हवा की परत जमीन के करीब प्रदूषकों को रोक सकती है। इससे धुआं और अन्य प्रदूषक वातावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं।
4. पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में पराली जलाने का असर
रिपोर्ट में पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में खेतों में आग लगने की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर वहां पराली जलाने की गतिविधियां दिखाई देने का दावा किया गया है। हालांकि, सीमा पार से आने वाले धुएं का पंजाब के अलग-अलग शहरों के प्रदूषण में कितना योगदान रहा, इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
निजी प्लेटफॉर्म और सरकारी AQI आंकड़ों में अंतर क्यों?
रिपोर्ट में दिए गए 1000 से अधिक AQI के आंकड़े निजी और वैश्विक ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म, जैसे AQI.in और IQAir के रियल-टाइम डेटा पर आधारित हैं। इन्हें सरकारी आंकड़ों के समान नहीं माना जाना चाहिए।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और पंजाब पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के आंकड़े निर्धारित निगरानी केंद्रों और तय औसत अवधि के आधार पर जारी किए जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 3 नवंबर के सरकारी बुलेटिन में पंजाब का औसत AQI लगभग 242 के आसपास था, जबकि निजी प्लेटफॉर्म पर सुबह के समय कुछ स्थानों की लाइव रीडिंग 1000 के पार दिखाई गई।
इस अंतर की एक वजह मापन की पद्धति और औसत निकालने की अवधि हो सकती है। सरकारी AQI स्केल में 500 को ऊपरी सीमा माना जाता है, जबकि कुछ निजी प्लेटफॉर्म PM2.5 की सांद्रता के आधार पर इससे अधिक संख्यात्मक वैल्यू भी दिखाते हैं। इसलिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म की रीडिंग की तुलना करते समय उनके मापन मानकों और समयावधि को समझना जरूरी है।
लोगों के स्वास्थ्य के लिए बढ़ी चिंता
प्रदूषण के इस स्तर पर खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। बाहर निकलते समय प्रदूषण के स्तर पर ध्यान दें और अनावश्यक रूप से लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने से बचें। सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण महसूस होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
पंजाब में बढ़ता प्रदूषण एक बार फिर पराली प्रबंधन, मौसम और क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता पर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत को सामने ला रहा है।

