जगतार सिंह हवारा की पंजाब जेल में शिफ्टिंग टली, सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने बाद सुनवाई तय की

जगतार सिंह हवारा की पंजाब जेल में शिफ्टिंग टली, सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने बाद सुनवाई करने का फैसला किया

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा को फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी ट्रांसफर याचिका पर सुनवाई तीन महीने के लिए टाल दी है। अदालत के सामने पेश की गई इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि हवारा को पंजाब की जेल में शिफ्ट करने से राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान कानून-व्यवस्था और राजनीतिक माहौल प्रभावित हो सकता है।

3 नवंबर को न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने हवारा के स्थानांतरण से जुड़े संभावित सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के प्रभाव पर IB से रिपोर्ट मांगी थी। पंजाब सरकार ने भी उसके स्थानांतरण को लेकर चिंता जताई थी।

IB रिपोर्ट में चुनाव और कानून-व्यवस्था पर असर की आशंका

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने IB की रिपोर्ट का हवाला देते हुए हवारा को पंजाब स्थानांतरित करने का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि उसके स्थानांतरण से राज्य की कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान इसका असर देखने को मिल सकता है।

भाटी ने अदालत को बताया कि हवारा पहले भी जेल से फरार होने की घटना में शामिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उसे चंडीगढ़ की जेल में सुरंग खोदने के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। सरकार की ओर से आशंका जताई गई कि जेल बदलने की प्रक्रिया के दौरान उसके फरार होने का जोखिम भी हो सकता है।

केंद्र ने हाई-सिक्योरिटी कैदियों से जुड़ी एडवाइजरी का दिया हवाला

केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई कि गृह मंत्रालय ने हाई-रिस्क कैदियों को एक जेल से दूसरी जेल में स्थानांतरित करने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ऐश्वर्या भाटी ने इन दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि हवारा के मामले में सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने पंजाब सरकार के हलफनामे का भी उल्लेख किया और कहा कि स्थानांतरण का फैसला राज्य की कानून-व्यवस्था पर असर डाल सकता है।

हवारा के वकील बोले- मां की उम्र 90 साल से ज्यादा

हवारा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एस. मुरलीधर ने स्थानांतरण का विरोध करने वाली दलीलों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि तिहाड़ जेल को पंजाब की अन्य जेलों से अधिक सुरक्षित मानने का कोई आधार नहीं है।

मुरलीधर ने अदालत को बताया कि हवारा की मां की उम्र 90 वर्ष से अधिक है और उनकी तबीयत गंभीर बताई जा रही है। उन्होंने कम से कम मां से मुलाकात की अनुमति देने की मांग की। वकील ने यह भी बताया कि इस संबंध में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पैरोल के लिए आवेदन लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- IB रिपोर्ट गंभीर, चुनाव के बाद होगी सुनवाई

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश ने कहा कि अदालत को आमतौर पर जेल में मुलाकात की अनुमति देने पर कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन इस मामले में IB की रिपोर्ट गंभीर है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में कोई आदेश आगामी चुनावों के दौरान अशांति पैदा कर सकता है।

इसके बाद हवारा के वकील ने सुझाव दिया कि यदि चुनावों को लेकर चिंता है, तो मामले की सुनवाई चुनाव समाप्त होने के बाद की जा सकती है। अदालत ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए सुनवाई तीन महीने के लिए स्थगित कर दी।

बेअंत सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहा है हवारा

जगतार सिंह हवारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस मामले में उसे पहले मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया। वह फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।

हवारा की याचिका में उसे पंजाब की जेल में स्थानांतरित करने की मांग की गई है, ताकि वह अपनी बुजुर्ग मां से मिल सके। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल स्थानांतरण पर कोई आदेश नहीं दिया है और मामले को आगे की सुनवाई के लिए टाल दिया है।

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