अरुणाचल में ट्रक हादसे में मोहाली के सूबेदार शहीद, रिटायरमेंट से 4 महीने पहले देश के लिए दी सर्वोच्च कुर्बानी
पंजाब के मोहाली जिले के लिए रविवार का दिन बेहद भावुक रहा। भारतीय सेना के सूबेदार सुरिंदर सिंह को उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अरुणाचल प्रदेश में सेना का ट्रक दुर्घटनाग्रस्त होने के दौरान घायल हुए सूबेदार सुरिंदर सिंह ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उनकी सेवानिवृत्ति में केवल चार महीने का समय शेष था।
सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई
रविवार को शहीद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव नगलियां पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण, सेना के अधिकारी और प्रशासनिक प्रतिनिधि अंतिम दर्शन के लिए मौजूद रहे। पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
इस दौरान शहीद के 11 वर्षीय बेटे परमिंदर सिंह ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। सेना की ओर से राष्ट्रीय ध्वज शहीद की पत्नी रणजीत कौर को सम्मानपूर्वक सौंपा गया। इस भावुक क्षण ने उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम कर दीं।
अरुणाचल प्रदेश में हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले के दिरांग क्षेत्र में हुई। भारतीय सेना की 18 सिख लाइट इन्फैंट्री का ट्रक पहाड़ी मार्ग पर नियंत्रण खो बैठा और गहरी खाई में जा गिरा।
हादसे के समय वाहन में तीन सैनिक सवार थे। दुर्घटना में सूबेदार सुरिंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि दो अन्य जवान भी जख्मी हुए। घायल जवानों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
रेस्क्यू अभियान के बाद अस्पताल में तोड़ा दम
दुर्घटना की सूचना मिलते ही सशस्त्र सीमा बल (SSB) की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और सभी जवानों को सुरक्षित बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल सूबेदार सुरिंदर सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
चार महीने बाद होने वाले थे रिटायर
47 वर्षीय सूबेदार सुरिंदर सिंह लंबे समय से भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। परिवार के अनुसार, उनकी सेवा अवधि पूरी होने में केवल चार महीने बाकी थे। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में मेहनत और समर्पण के बल पर सेना में सूबेदार का पद हासिल किया था।
परिवार पर पहले भी टूटा था दुख
परिजनों के मुताबिक, कुछ वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में शहीद सुरिंदर सिंह के बड़े भाई और छोटी बहन की भी मृत्यु हो चुकी थी। अब परिवार में उनकी बुजुर्ग मां, पत्नी और एक बेटा हैं। लगातार मिली इन दुखद घटनाओं से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
गांव ने नम आंखों से दी विदाई
शहीद की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और सेना के अधिकारियों ने भाग लिया। पूरे गांव ने भारत माता के वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी शहादत को नमन किया। सेना की ओर से उन्हें अंतिम सलामी दी गई और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।

