पंजाब कांग्रेस में बढ़ी सियासी हलचल, सिद्धू गुट की एंट्री; संगठन को लेकर फिर तेज हुई अंदरूनी खींचतान
पंजाबी दूरदर्शन | मोहाली
पंजाब कांग्रेस में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच अब नवजोत सिंह सिद्धू से जुड़े नेताओं की भी इस बहस में एंट्री हो गई है।
पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) मोहम्मद मुस्तफा ने पार्टी नेतृत्व को संबोधित एक खुला पत्र जारी करते हुए पंजाब कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने संगठन में मजबूत और निर्णायक नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रदेश अध्यक्ष के चयन को योग्यता के आधार पर करने की बात कही।
मोहम्मद मुस्तफा ने उठाए संगठन से जुड़े सवाल
अपने खुले पत्र में मोहम्मद मुस्तफा ने कहा कि पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रम पार्टी के लिए चिंताजनक हैं। उनका मानना है कि संगठनात्मक फैसलों में देरी के कारण कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश नेतृत्व का चयन किसी दबाव या संतुलन बनाने के बजाय संगठन की जरूरत और नेतृत्व क्षमता को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
राजा वड़िंग समर्थन जुटाने में सक्रिय
दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी लगातार वरिष्ठ नेताओं और पूर्व विधायकों से मुलाकात कर रहे हैं। हाल के दिनों में उन्होंने कई कांग्रेस नेताओं से व्यक्तिगत बैठकें की हैं, जिन्हें संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन बैठकों के जरिए प्रदेश नेतृत्व अपने समर्थन का आधार मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
चन्नी की सक्रियता के बाद बढ़ी सियासी हलचल
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा समर्थकों के साथ बैठक आयोजित किए जाने के बाद कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति चर्चा का विषय बनी हुई है। पार्टी के विभिन्न नेताओं की बढ़ती सक्रियता को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले संगठनात्मक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अब तक किसी बड़े बदलाव को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
हाईकमान के फैसले पर टिकी निगाहें
पंजाब कांग्रेस में जारी इन राजनीतिक गतिविधियों के बीच अब सभी की नजर कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम पर है। संगठनात्मक नेतृत्व, चुनावी रणनीति और भविष्य की जिम्मेदारियों को लेकर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल पार्टी के अलग-अलग नेता अपनी-अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से सार्वजनिक रूप से संगठन की एकजुटता बनाए रखने की बात दोहराई जा रही है।

