अमृतसर में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हुआ मुश्किल? 3 हजार से ज्यादा आवेदन लंबित, आवेदक परेशान
अमृतसर: पंजाब के अमृतसर जिले में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नियमित अधिकारी की जगह अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे अधिकारी को जिम्मेदारी दिए जाने के बाद सरकारी कामकाज प्रभावित होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रैक पर 3 हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं, जिसके चलते ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने और अन्य परिवहन संबंधी सेवाओं के लिए पहुंच रहे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नियमित अधिकारी की जगह अतिरिक्त प्रभार वाले अधिकारी को जिम्मेदारी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सचिव आरटीए हितेश्वर गुप्ता ने अमृतसर के ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर तैनात नियमित एडीटीओ मनदीप सिंह सोही को हटाकर तरनतारन में तैनात एटीओ मनिंदर सिंह को जिम्मेदारी सौंपी है। मनिंदर सिंह के पास अमृतसर का अतिरिक्त प्रभार भी है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण वह सप्ताह में केवल दो दिन ही अमृतसर में उपलब्ध हो सकते हैं। ऐसे में ट्रैक पर नियमित अधिकारी की मौजूदगी और आवेदनों के समय पर निपटारे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
3 हजार से अधिक आवेदन लंबित, लोगों को लौटना पड़ रहा खाली हाथ
अमृतसर के ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर लंबित आवेदनों की संख्या 3 हजार से अधिक बताई जा रही है। इनमें लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस, स्थायी लाइसेंस, वाहन में नई श्रेणी जुड़वाने और अन्य परिवहन संबंधी सेवाओं के आवेदन शामिल हैं।
इन मामलों के निपटारे में संबंधित अधिकारी की भूमिका अहम होती है। नियमित अधिकारी की अनुपलब्धता के कारण कामकाज प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई हैं। कई आवेदकों को ट्रैक पर पहुंचने के बाद भी काम पूरा हुए बिना लौटना पड़ रहा है।
इस स्थिति से उन लोगों की परेशानी बढ़ सकती है, जिन्हें लाइसेंस या अन्य जरूरी दस्तावेजों के लिए तय समय पर सरकारी प्रक्रिया पूरी करनी है।
पहले भी जांच और प्रशासनिक बदलावों को लेकर चर्चा में रहा ट्रैक
अमृतसर का ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पहले भी कथित अनियमितताओं और एजेंटों की भूमिका को लेकर चर्चा में रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब सरकार के शुरुआती कार्यकाल में अमृतसर, जालंधर, लुधियाना समेत कई जिलों के ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर विजिलेंस की कार्रवाई हुई थी। उस दौरान रिकॉर्ड जब्त किए जाने और कुछ लोगों के खिलाफ मामले दर्ज होने का भी उल्लेख किया गया था।
इसके बाद ट्रैक की व्यवस्था में सुधार के लिए प्रशासनिक स्तर पर बदलाव किए गए। पूर्व अधिकारियों के कार्यकाल में कर्मचारियों के तबादले और अतिरिक्त एडीटीओ की तैनाती जैसे कदम उठाए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
हालांकि, मौजूदा स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पुरानी जांच और सुधारात्मक कदमों के प्रभाव की समीक्षा की मांग की जा रही है।
स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर और विजिलेंस विभाग से शिकायत
ट्रैक पर कामकाज प्रभावित होने के मुद्दे को लेकर वॉयस ऑफ अमृतसर सिटी के प्रधान विजय कुमार अग्रवाल ने स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर और विजिलेंस विभाग को शिकायत भेजी है।
शिकायत में नियमित एडीटीओ की तैनाती की मांग करते हुए कहा गया है कि ट्रैक पर बड़ी संख्या में लोग ड्राइविंग टेस्ट और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अधिकारी की नियमित उपलब्धता जरूरी है, ताकि आवेदनों का निपटारा समय पर हो सके।
विजिलेंस जांच की संभावना, प्रशासन के कदमों पर नजर
मीडिया रिपोर्ट में विजिलेंस मुख्यालय, चंडीगढ़ के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि मामला गंभीर है और जरूरत पड़ने पर फ्लाइंग स्क्वॉड से जांच करवाई जा सकती है।
फिलहाल, लंबित आवेदनों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह देखना अहम होगा कि संबंधित विभाग नियमित अधिकारी की तैनाती और कामकाज में सुधार के लिए क्या कदम उठाता है। आवेदकों को राहत देने के लिए लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा और अधिकारियों की नियमित उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नोट: लंबित आवेदनों की संख्या, अधिकारियों की तैनाती और विजिलेंस जांच से जुड़ी जानकारी उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है। संबंधित विभाग की आधिकारिक पुष्टि या आगे की कार्रवाई की जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

