अमृतसर के दुर्ग्याणा तीर्थ में लंगूर मेला शुरू, संतान की मन्नत पूरी होने पर लंगूर बने बच्चे
अमृतसर: पंजाब के अमृतसर स्थित ऐतिहासिक दुर्ग्याणा तीर्थ के बड़े हनुमान मंदिर में रविवार से प्रसिद्ध लंगूर मेला शुरू हो गया है। नवरात्र के दौरान आयोजित होने वाले इस मेले में श्रद्धालु अपने बच्चों को लंगूर का रूप देकर मंदिर पहुंच रहे हैं। लाल गोटेदार पोशाक, सिर पर शंकु के आकार की टोपी और हाथ में छोटी छड़ी लिए बच्चे मंदिर परिसर में नजर आ रहे हैं।
इस धार्मिक परंपरा को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। हर साल बड़ी संख्या में परिवार इस मेले में शामिल होकर बजरंगबली के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
संतान प्राप्ति की मन्नत से जुड़ी है परंपरा
दुर्ग्याणा तीर्थ के बड़े हनुमान मंदिर में लंगूर मेला आयोजित होने के पीछे श्रद्धालुओं की गहरी धार्मिक आस्था है। मान्यता के अनुसार, संतान की इच्छा रखने वाले दंपती यहां बजरंगबली के दरबार में मन्नत मांगते हैं।
मनोकामना पूरी होने के बाद माता-पिता नवरात्र के दौरान अपने बच्चे को मंदिर लेकर आते हैं और उसे लंगूर की पारंपरिक वेशभूषा पहनाते हैं। इस दौरान बच्चे को हनुमान जी के स्वरूप के रूप में देखा जाता है।
10 दिनों तक निभाने होते हैं धार्मिक नियम
लंगूर बनने वाले बच्चे नवरात्र के दौरान करीब 10 दिनों तक विशेष वेशभूषा धारण करते हैं। उनकी लाल गोटेदार पोशाक, शंकु जैसी टोपी और हाथ में छोटी छड़ी इस परंपरा की खास पहचान है।
इस अवधि में बच्चों और उनके परिवारों को धार्मिक परंपरा से जुड़े कई नियमों का पालन करना होता है। परिवार इन नियमों का ध्यान रखते हुए पूरी श्रद्धा के साथ मेले में भाग लेते हैं।
रावण दहन के अगले दिन पूरी होती है परंपरा
परंपरा के अनुसार, रावण दहन के अगले दिन सुबह लंगूर बने बच्चे बड़े हनुमान मंदिर में माथा टेकते हैं। इसके बाद वे अपना चोला उतारते हैं और नवरात्र के दौरान निभाई जाने वाली धार्मिक परंपरा पूरी होती है।
अमृतसर का यह अनूठा धार्मिक मेला हर साल श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। इस दौरान मंदिर परिसर में बच्चों की पारंपरिक वेशभूषा और भक्तों की मौजूदगी से खास धार्मिक माहौल बन जाता है।

