बठिंडा में पीआरटीसी कर्मचारियों की हड़ताल से बस स्टैंड पर सन्नाटा, 200 रूट प्रभावित
कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने मांगों को लेकर शुरू किया प्रदर्शन; यात्रियों को हुई परेशानी, यूनियन का दावा—सरकार के साथ 60 से ज्यादा बैठकें होने के बावजूद समाधान नहीं निकला
बठिंडा। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की हड़ताल का असर बुधवार, 21 अक्टूबर को बठिंडा में देखने को मिला। कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर हड़ताल शुरू की, जिससे बठिंडा डिपो की करीब 200 बसों का संचालन प्रभावित हुआ। सरकारी बसें नहीं चलने के कारण बस स्टैंड पर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
हड़ताल का असर खासकर उन महिलाओं पर पड़ा, जो सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा का लाभ उठाती हैं। यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए निजी बसों और अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ा। हालांकि, निजी बसों का संचालन जारी रहने से कुछ यात्रियों को राहत मिली।
सरकार के खिलाफ कर्मचारियों का प्रदर्शन
पीआरटीसी बठिंडा डिपो के बाहर कर्मचारियों ने धरना देकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। यूनियन के डिपो प्रधान सरबजीत सिंह भुल्लर ने पंजाब सरकार पर कर्मचारियों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
भुल्लर के अनुसार, कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से ठोस समाधान नहीं निकाला गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों, किसानों और मजदूरों को बार-बार आश्वासन दिए जाते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर समस्याएं बनी हुई हैं।
सरकार के साथ 60 से ज्यादा बैठकें बेनतीजा
यूनियन प्रधान ने दावा किया कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर यूनियन और सरकार के बीच 60 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं। इसके बावजूद किसी भी बैठक से ऐसा समाधान नहीं निकला, जिससे कर्मचारियों की समस्याएं दूर हो सकें।
उन्होंने कहा कि लगातार बातचीत के बाद भी मांगें पूरी नहीं होने के कारण कर्मचारियों को हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। यूनियन का कहना है कि लंबे समय से काम कर रहे कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी अब तक पूरी नहीं हुई है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- परिवहन विभाग के कार्यों को खतरनाक श्रेणी में शामिल किया जाए।
- आउटसोर्स और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
- संघर्ष के दौरान कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज कथित झूठे मामले रद्द किए जाएं।
- जेल में बंद कर्मचारी साथियों को रिहा किया जाए।
- नौकरी से निकाले गए पनबस और पीआरटीसी कर्मचारियों को तत्काल बहाल किया जाए।
- किलोमीटर स्कीम के तहत बसों के टेंडर बंद किए जाएं।
- परिवहन विभाग के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
यात्रियों को निजी बसों का लेना पड़ा सहारा
सरकारी बसों का संचालन प्रभावित होने से बठिंडा बस स्टैंड से विभिन्न शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा के लिए वैकल्पिक साधन तलाशने पड़े। निजी बसें चलने के बावजूद सरकारी बसों पर निर्भर यात्रियों को परेशानी हुई।
हड़ताल के कारण सेवाओं पर पड़े असर के बीच अब कर्मचारियों की मांगों और सरकार के रुख पर नजर रहेगी। फिलहाल, यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है।

