चंडीगढ़ में अब नहीं मिलेंगे प्लॉट, सिर्फ फ्लैट बनेंगे: नई हाउसिंग पॉलिसी में ग्रुप हाउसिंग को मंजूरी

चंडीगढ़ में अब कोठियों की जगह फ्लैट संस्कृति

Chandigarh में अब लोग अपनी पसंद की कोठी बनवाने के लिए प्लॉट नहीं खरीद सकेंगे। प्रशासन ने संशोधित मास्टर प्लान में प्लॉटेड डेवलपमेंट बंद कर केवल ग्रुप हाउसिंग और फ्लैट्स को बढ़ावा देने का प्रस्ताव दिया है।

इस फैसले के बाद शहर में हॉरिजॉन्टल ग्रोथ की बजाय वर्टिकल ग्रोथ यानी मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स का दौर बढ़ेगा।

1 से 30 सेक्टर तक नहीं बनेंगी हाईराइज बिल्डिंग्स

प्रशासन के अनुसार:

  • सेक्टर 1 से 30 तक का इलाका हेरिटेज जोन में आता है
  • यहां मल्टीस्टोरी निर्माण की अनुमति नहीं होगी
  • बाकी सेक्टरों और नए एरिया में ग्रुप हाउसिंग को प्राथमिकता दी जाएगी

खाली प्लॉटों पर अब ग्रुप हाउसिंग

फेज-II और फेज-III के कई खाली प्लॉट क्लस्टरों को अब:

  • व्यक्तिगत प्लॉट की बजाय
  • 4 से 6 मंजिला फ्लैट्स वाली हाई-डेंसिटी हाउसिंग में बदला जाएगा

मलोया के पास करीब 178 एकड़ क्षेत्र में हाईराइज आवासीय प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना है।

प्रशासन ने यह फैसला क्यों लिया?

Chandigarh Administration का मानना है कि:

  • शहर लगभग पूरी तरह बस चुका है
  • जमीन की भारी कमी हो रही है
  • बढ़ती आबादी के लिए वर्टिकल डेवलपमेंट जरूरी है

इसी कारण संशोधित मास्टर प्लान में फ्लैट आधारित हाउसिंग मॉडल पर जोर दिया गया है।

इंडस्ट्रियल एरिया में भी बड़े बदलाव

नई पॉलिसी के तहत:

  • FAR बढ़ाकर 2.0 किया गया
  • ग्राउंड कवरेज 60% तय
  • मजदूरों और सिक्योरिटी गार्ड्स के लिए डॉरमेट्री/हॉस्टल की अनुमति
  • इंडस्ट्रियल एरिया फेज-III में मिक्स्ड लैंड यूज लागू होगा

पार्किंग समस्या का भी समाधान

नई योजना में:

  • स्टिल्ट पार्किंग को बढ़ावा
  • बिल्डिंग परिसर के अंदर पार्किंग अनिवार्य
  • पार्किंग स्पेस घरों के कुल फ्लोर एरिया के कम से कम 30% के बराबर रखना होगा

क्या होगा असर?

इस फैसले के बाद:

  • स्वतंत्र कोठियों की संख्या कम होगी
  • फ्लैट संस्कृति बढ़ेगी
  • जमीन का बेहतर उपयोग हो सकेगा
  • शहर की आबादी को अधिक व्यवस्थित तरीके से बसाया जा सकेगा

हालांकि, कई लोग इसे चंडीगढ़ की मूल “कोठी संस्कृति” और ओपन प्लानिंग मॉडल के लिए बड़ा बदलाव मान रहे हैं।

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