चंडीगढ़ के फार्मा कारोबारी का दिवाली गिफ्ट: 4 टॉप परफॉर्मर्स को दीं कारें, अब गार्ड से अधिकारियों तक को मिलेगा लकी ड्रॉ का मौका
चंडीगढ़ के फार्मा कारोबारी एमके भाटिया एक बार फिर कर्मचारियों को दिवाली पर कारें देने को लेकर चर्चा में हैं। हर साल अपने कर्मचारियों को महंगे तोहफे देने वाले भाटिया ने इस बार अपनी पहल का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। अब कार जीतने का मौका सिर्फ बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सिक्योरिटी गार्ड से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक को लकी ड्रॉ में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
जानकारी के मुताबिक, बुधवार, 28 अक्टूबर को लकी ड्रॉ आयोजित किया जाएगा। इसमें कुल 35 लोगों को शामिल किया जाएगा। खास बात यह है कि कंपनी में निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले अलग-अलग पदों के कर्मचारी इसमें हिस्सा ले सकेंगे।
वहीं, इस साल चार कर्मचारियों को उनके बेहतर प्रदर्शन के आधार पर कारें दी जा चुकी हैं। इसके अलावा, लकी ड्रॉ के जरिए एक और कार देने की घोषणा की गई है। पिछले साल दिवाली पर एमके भाटिया ने अपने कर्मचारियों को 51 कारें गिफ्ट की थीं।
लकी ड्रॉ में कौन ले सकेगा हिस्सा?
फार्मा कारोबारी एमके भाटिया के मुताबिक, उनके ग्रुप की कंपनियों में कम से कम 18 महीने से काम कर रहे योग्य कर्मचारियों के नाम लकी ड्रॉ में शामिल किए जाएंगे।
इस पहल की खास बात यह है कि इसमें कर्मचारी के पद से ज्यादा निर्धारित पात्रता को महत्व दिया जाएगा। यानी सिक्योरिटी गार्ड से लेकर बड़े पदों पर काम करने वाले कर्मचारी तक कार जीतने का मौका पा सकते हैं।
कंपनी की ओर से बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित करने की परंपरा भी जारी रहेगी। उनके काम और उपलब्धियों के आधार पर उन्हें कारें दी जाएंगी। इसके साथ ही लकी ड्रॉ के जरिए अन्य योग्य कर्मचारियों को भी बड़ा इनाम जीतने का अवसर मिलेगा।
कर्मचारियों के योगदान को सम्मान देने की कोशिश
एमके भाटिया का कहना है कि कंपनी की सफलता में योगदान देने वाले हर कर्मचारी को महत्व देना जरूरी है। आमतौर पर बड़े पुरस्कार बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को मिलते हैं, लेकिन लकी ड्रॉ के माध्यम से अलग-अलग पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी कार जीतने का अवसर दिया जा रहा है।
इस पहल के जरिए कंपनी प्रदर्शन के आधार पर कर्मचारियों को सम्मानित करने के साथ-साथ अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती है।
15% डाउन पेमेंट, बाकी रकम की EMI सैलरी से कटेगी
जानकारी के अनुसार, एक कार की कीमत करीब 10.5 लाख रुपये है। कार खरीदने के लिए मालिक की ओर से 15 प्रतिशत डाउन पेमेंट की जाती है, जबकि बाकी रकम की ईएमआई कर्मचारी की सैलरी से हर महीने काटी जाती है।
इसके अलावा, कर्मचारियों को पेट्रोल खर्च के लिए हर महीने 2,500 रुपये भी दिए जाते हैं। इस तरह कार देने की पहल के साथ कर्मचारियों को ईंधन खर्च में भी सहायता मिलती है।
मुजफ्फरनगर से चंडीगढ़ तक का सफर
एमके भाटिया मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में वहां मेडिकल स्टोर चलाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2002 में कारोबार में गिरावट आने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी और वह दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गए थे। उस समय उन पर करोड़ों रुपये का कर्ज था।
इसके बाद वह वर्ष 2015 में चंडीगढ़ आ गए और यहां फार्मास्युटिकल कारोबार शुरू किया। आज उनके ग्रुप की 12 कंपनियां चल रही हैं।
100 से ज्यादा कर्मचारियों को दे चुके हैं कारें
एमके भाटिया के कार्यालय चंडीगढ़ और पंचकूला में हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में दिवाली पर कर्मचारियों को देने के लिए कारें कंपनी के नाम पर खरीदी जाती थीं, लेकिन अब गाड़ियां सीधे कर्मचारियों के नाम पर ली जाती हैं।
उनके मुताबिक, अब तक 100 से ज्यादा कर्मचारियों को कारें दी जा चुकी हैं। हालांकि, इस पहल के बढ़ने के साथ कार्यालयों के आसपास पार्किंग की समस्या भी सामने आने लगी है। कारोबारी का कहना है कि इस समस्या को दूर करने के लिए भी काम किया जा रहा है।
एमके भाटिया की यह पहल कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने और कंपनी की तरक्की में उनके योगदान को सम्मान देने के एक अलग तरीके के रूप में देखी जा रही है।

