Golden Temple Prakash Purab: पहले प्रकाश पर्व को लेकर अमृतसर में खास तैयारियां
अमृतसर: श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व को लेकर अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के अमृतसर पहुंचने की उम्मीद है। गोल्डन टेंपल परिसर को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है और संगत लगातार नतमस्तक होने के लिए पहुंच रही है।
पहले प्रकाश पर्व के अवसर पर गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से श्री हरमंदिर साहिब तक नगर कीर्तन सजाया जाएगा। यह नगर कीर्तन पुरातन परंपरा के अनुसार निकाला जाएगा, जिसमें SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, सिंह साहिबान और अन्य प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक शख्सियतें शामिल होंगी।
रात को दीपमाला और आतिशबाजी
प्रकाश पर्व के मौके पर श्री हरमंदिर साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब और गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में जलौ सजाए जाएंगे।
रात के समय गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में शब्द विचार और कीर्तन समागम होगा। इसके बाद श्री हरमंदिर साहिब परिसर में दीपमाला की जाएगी। श्रद्धालु इस धार्मिक अवसर पर दीपों की रोशनी से जगमगाते परिसर के दर्शन करेंगे। कार्यक्रम के दौरान आतिशबाजी भी की जाएगी।
60 टन से ज्यादा फूलों से सजा परिसर
पहले प्रकाश पर्व को खास बनाने के लिए श्री हरमंदिर साहिब परिसर की फूलों से विशेष सजावट की गई है। सजावट में 60 टन से अधिक फूलों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
फूलों से परिसर के अलग-अलग हिस्सों को आकर्षक रूप दिया गया है। सजावट के लिए विभिन्न स्थानों से लाए गए फूलों का इस्तेमाल किया गया है। बड़ी संख्या में कारीगर और श्रद्धालु इस सेवा में जुटे रहे।
पहले प्रकाश पर्व का ऐतिहासिक महत्व
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश का सिख इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। सिख परंपरा के अनुसार, गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में श्री हरमंदिर साहिब में आदि ग्रंथ का पहला प्रकाश करवाया था।
उस समय बाबा बुड्ढा जी को पहले ग्रंथी के रूप में सेवा मिली। पहले प्रकाश के अवसर पर संगत की मौजूदगी में कीर्तन और धार्मिक दीवान सजाए गए थे।
भाई गुरदास जी ने लिखी थी आदि ग्रंथ की बीड़
गुरु अर्जन देव जी के मार्गदर्शन में भाई गुरदास जी ने आदि ग्रंथ की बीड़ तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें गुरबाणी को संकलित किया गया और बाद में गुरु तेग बहादुर जी की बाणी को शामिल किए जाने के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का स्वरूप पूर्ण हुआ।
सिख परंपरा में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को जीवंत गुरु के रूप में सर्वोच्च सम्मान प्राप्त है। दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी, ने 1708 में गुरु ग्रंथ साहिब जी को गुरु की पदवी प्रदान की।
मानवता और समानता का संदेश
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को केवल सिख समुदाय के धार्मिक ग्रंथ के रूप में नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शक माना जाता है। इसकी बाणी मानवता, समानता, भाईचारे, सेवा और आपसी सद्भाव का संदेश देती है।
पहले प्रकाश पर्व के अवसर पर अमृतसर में होने वाले धार्मिक समागम इसी आध्यात्मिक परंपरा और गुरु साहिब के संदेश को संगत तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगे।
प्रकाश पर्व को लेकर अमृतसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है और श्री हरमंदिर साहिब परिसर में धार्मिक माहौल बना हुआ है।

