झोटा हत्याकांड की जांच तेज, CBI की तीन टीमें जुटा रहीं सबूत; हथियार लाइसेंस की भी होगी जांच
मानसा में एंटी ड्रग टास्क फोर्स के संचालक परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच तेज कर दी है। मामले में तीन टीमें अलग-अलग स्थानों पर साक्ष्य जुटा रही हैं। जांच के दायरे में मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार के संपर्कों, कथित साजिश और उसे जारी किए गए हथियार लाइसेंस से जुड़े पहलू भी शामिल हैं। इस मामले में कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, हालांकि उनकी जिम्मेदारी अभी जांच का विषय है।
CBI ने 13 अक्टूबर को मामले में FIR दर्ज की थी। इसके बाद से एजेंसी घटनास्थल और आरोपी से जुड़े स्थानों की जांच कर रही है। मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को पांच दिन के CBI रिमांड पर भेजा गया है, जहां उससे वारदात और उससे जुड़े अन्य पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है।
मेडिकल स्टोर से फोरेंसिक सैंपल जुटाए
जांच के तहत CBI की फोरेंसिक टीम ने आरोपी अश्वनी कुमार के मेडिकल स्टोर से सैंपल एकत्र किए हैं। इसके अलावा घटनास्थल के आसपास स्थित दुकानों के मालिकों से भी पूछताछ की गई है। एजेंसी घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
जांच टीम ने आरोपी से संबंधित अन्य स्थानों का भी निरीक्षण किया है। इन साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद वारदात के घटनाक्रम और उसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
जिस जूतों की दुकान पर गिरे थे झोटा, वहां भी जांच
CBI की फोरेंसिक टीम घटनास्थल के पास स्थित एक जूतों की दुकान पर भी पहुंची। बताया जाता है कि गोली लगने के बाद परविंदर सिंह झोटा आखिरी बार इसी दुकान पर गिरे थे। विशेषज्ञों ने यहां से भी सैंपल जुटाए हैं।
जांच एजेंसी इन साक्ष्यों के आधार पर घटना के क्रम को समझने और उपलब्ध तथ्यों का मिलान करने में जुटी है।
पांच पुलिस मामलों के उल्लेख के बावजूद जारी हुआ हथियार लाइसेंस
मामले में आरोपी अश्वनी कुमार को जारी किए गए हथियार लाइसेंस की जांच भी अहम मानी जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मानसा के SSP ने 9 अगस्त 2024 को पत्र संख्या 91/NAL के जरिए अश्वनी कुमार को हथियार लाइसेंस देने की सिफारिश की थी। इस सिफारिश में उसके खिलाफ दर्ज पांच पुलिस मामलों का भी उल्लेख था।
इनमें मानसा के सिटी-2 थाने में 4 अप्रैल 2024 को दर्ज FIR नंबर 66 का जिक्र भी किया गया था। बताया गया कि इस मामले को उसकी सुरक्षा से जुड़े आधार के रूप में पेश किया गया था।
इसके बाद 21 अगस्त 2024 को अश्वनी कुमार को हथियार लाइसेंस जारी किया गया, जिसकी वैधता 20 अगस्त 2029 तक थी। अब CBI इस प्रक्रिया और इससे संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है कि लाइसेंस जारी करते समय निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
पिस्टल और 12 बोर की बंदूक के रिकॉर्ड खंगालेगी CBI
जानकारी के मुताबिक, अश्वनी कुमार के पास 7.62 एमएम की पिस्टल और 12 बोर की बंदूक थी। लाइसेंस के तहत उसे एक बार में 50 और सालभर में अधिकतम 100 कारतूस खरीदने की अनुमति दी गई थी।
पुलिस के अनुसार, झोटा की हत्या में कथित तौर पर लाइसेंसी हथियार का इस्तेमाल किया गया था। ऐसे में CBI हथियारों, लाइसेंस और उनसे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। इस पड़ताल से लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया और वारदात में इस्तेमाल हथियार से संबंधित तथ्यों को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
पुरानी रंजिश को भी माना जा रहा हत्या की वजह
पुलिस जांच में हत्या के पीछे पुरानी रंजिश का पहलू भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, अश्वनी कुमार वर्ष 2023 में हुई एक घटना के बाद से परविंदर सिंह झोटा से नाराज था।
बताया जाता है कि उस समय झोटा ने अश्वनी कुमार को जूतों की माला पहनाकर शहर में घुमाया था। इस घटना को लेकर अश्वनी खुद को अपमानित महसूस करता था। पुलिस को आशंका है कि इसी रंजिश के चलते उसने झोटा को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई थी। हालांकि, हत्या के पीछे की पूरी वजह और कथित साजिश की पुष्टि जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर होगी।
आरोपी की पत्नी नीलम रानी भी नामजद
पुलिस ने मामले में अश्वनी कुमार की पत्नी नीलम रानी को भी हत्या की साजिश के आरोप में नामजद किया है। पुलिस का आरोप है कि नीलम को अपने पति की कथित योजना की जानकारी थी, लेकिन उसने न तो पुलिस को इसकी सूचना दी और न ही उसे रोकने का प्रयास किया।
हालांकि, नीलम रानी की भूमिका और उसकी आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा। फिलहाल इस संबंध में लगाए गए आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत साबित किया जाना बाकी है।
पांच दिन के CBI रिमांड पर मुख्य आरोपी
परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को मोहाली स्थित CBI अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने उसे पांच दिन के CBI रिमांड पर भेजा है।
रिमांड के दौरान जांच एजेंसी उससे कथित हत्या की साजिश, हथियार लाइसेंस जारी होने की प्रक्रिया, उसके संपर्कों और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका के संबंध में पूछताछ कर सकती है। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में नए तथ्य सामने आने की संभावना है। अधिकारियों या अन्य व्यक्तियों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाएगा।

