बेअदबी कानून पर पंजाब सरकार ने श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपा संशोधित मसौदा, आपत्तियां दूर करने का दावा

बेअदबी कानून का संशोधित मसौदा श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपा, सरकार ने आपत्तियां दूर करने का किया दावा

पंजाबी दूरदर्शन | अमृतसर

पंजाब सरकार ने प्रस्तावित बेअदबी रोकथाम कानून का संशोधित मसौदा (ड्राफ्ट) बुधवार को श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय को सौंप दिया। सरकार की ओर से विधायक डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने संशोधित दस्तावेज सचिवालय के प्रतिनिधियों को सौंपे।

सरकार का कहना है कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से पहले जताई गई प्रमुख आपत्तियों को संशोधित मसौदे में संबोधित किया गया है।

सरकार ने क्या कहा?

मीडिया से बातचीत में डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा मसौदे पर उठाए गए सभी प्रमुख बिंदुओं पर सरकार ने विचार किया है और संशोधित ड्राफ्ट में आवश्यक बदलाव किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि अब यह मसौदा श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय के अध्ययन के लिए भेजा गया है। सचिवालय की ओर से जो भी सुझाव या निर्णय आएगा, उस पर सरकार आगे विचार करेगी।

अब क्या होगी आगे की प्रक्रिया?

संशोधित मसौदा मिलने के बाद श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय इसका विस्तृत अध्ययन करेगा। इसके बाद अपनी राय और सुझाव सरकार को भेजे जा सकते हैं। फिलहाल इस मसौदे को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है।

किन बिंदुओं पर पहले जताई गई थीं आपत्तियां?

इससे पहले श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से प्रस्तावित कानून के कई प्रावधानों पर आपत्तियां जताई गई थीं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • धार्मिक शब्दावली के प्रयोग को लेकर आपत्ति।
  • कस्टोडियन (संभालकर्ता) संबंधी प्रावधानों को हटाने की मांग।
  • श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों के लिए यूनिक नंबर और डिजिटल रिकॉर्ड संबंधी व्यवस्था पर सवाल।
  • कस्टोडियन की जिम्मेदारियां तय करने के अधिकार पर आपत्ति।
  • सजा से जुड़े कुछ प्रावधानों को स्पष्ट करने की मांग।
  • दुर्घटना की स्थिति में धार्मिक स्वरूपों के कानूनी प्रबंधन से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट करने की आवश्यकता।

इन सभी बिंदुओं पर सरकार ने संशोधन किए जाने का दावा किया है।

अंतिम निर्णय का इंतजार

अब इस पूरे मामले में अगला कदम श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय की समीक्षा और उसके सुझावों पर निर्भर करेगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संशोधित मसौदे को लेकर धार्मिक संस्थाओं का अंतिम रुख क्या होगा और सरकार आगे किस प्रकार की कार्रवाई करेगी।

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