Punjab Power Crisis: 4 दिन में कोयला खत्म हुआ तो बढ़ेंगे बिजली कट, थर्मल प्लांट आधी क्षमता पर; 1,500 MW उत्पादन घटा

पंजाब में बिजली संकट गहराया, 4 दिन का कोयला बचा तो बढ़ सकते हैं कट; 1,500 MW उत्पादन घटा

जालंधर: पंजाब में बिजली की मांग बढ़ने और थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की कमी के बीच बिजली संकट गहराता नजर आ रहा है। पिछले कुछ दिनों से राज्य के कई हिस्सों में बिजली कटौती बढ़ी है। बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने कहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की उपलब्धता प्रभावित होने का असर पंजाब के बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है।

मंत्री के अनुसार, राज्य में बिजली उत्पादन करीब 1,500 मेगावाट तक कम हुआ है। उनका कहना है कि अगर कोयले की उपलब्धता में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में बिजली आपूर्ति पर दबाव और बढ़ सकता है।

राजपुरा और तलवंडी साबो प्लांट आधी क्षमता पर

बिजली मंत्री के मुताबिक राजपुरा स्थित नाभा पावर लिमिटेड और मानसा का तलवंडी साबो पावर प्लांट केंद्र से मिलने वाले कोयले पर निर्भर हैं। पर्याप्त कोयला नहीं मिलने के कारण इन दोनों संयंत्रों को फिलहाल कम क्षमता पर चलाना पड़ रहा है।

इन दोनों निजी थर्मल प्लांटों की संयुक्त स्थापित क्षमता करीब 3,960 MW है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्तमान में दोनों मिलकर लगभग आधी क्षमता पर उत्पादन कर रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि जिन प्लांटों के लिए पंजाब सरकार की ओर से कोयले की व्यवस्था की जा रही है, वहां फिलहाल लगभग 10 दिन तक का स्टॉक उपलब्ध है।

देशभर में कोयले की कमी का दावा

सोंध के अनुसार कोयले की समस्या केवल पंजाब तक सीमित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि देशभर में बड़ी संख्या में थर्मल पावर प्लांट इस संकट से प्रभावित हैं और कई निजी संयंत्रों के पास सीमित दिनों का ही स्टॉक बचा है।

मंत्री ने केंद्र सरकार से कोयले की आपूर्ति को सामान्य करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोयले की उपलब्धता प्रभावित रहने से बिजली उत्पादन और आपूर्ति दोनों पर दबाव पड़ सकता है।

पंजाब में बिजली की मांग 16,000 MW के पार

राज्य में मौजूदा बिजली मांग 16,000 MW से अधिक बताई जा रही है। इसके मुकाबले पंजाब की अपनी उत्पादन क्षमता लगभग 4,200 से 4,900 MW के बीच है।

बाकी जरूरत केंद्रीय ग्रिड से बिजली लेकर पूरी की जाती है। शाम के समय सौर ऊर्जा का उत्पादन कम होने के कारण ग्रिड से बिजली लेने की क्षमता पर भी दबाव बढ़ जाता है। इससे पीक आवर्स में मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच अंतर पैदा हो रहा है।

औद्योगिक क्षेत्रों में भी कटौती

बिजली की कमी का असर औद्योगिक इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार लुधियाना, खन्ना, मोहाली और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।

शाम के पीक समय में, खासकर शाम 7 बजे से रात 12 बजे के बीच, औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए कटौती की जा रही है। इसका असर उत्पादन गतिविधियों पर पड़ने की आशंका है।

पंजाब के थर्मल प्लांटों की स्थिति

राज्य के पांच थर्मल पावर प्लांटों की कुल क्षमता लगभग 5,680 MW बताई गई है, जबकि मौजूदा परिस्थितियों में उत्पादन करीब 3,300 से 3,400 MW के आसपास रहने की जानकारी दी गई है।

राजपुरा थर्मल प्लांट

नाभा पावर लिमिटेड के राजपुरा प्लांट की स्थापित क्षमता करीब 1,980 MW है। इसमें 660 MW की तीन इकाइयां शामिल हैं।

तलवंडी साबो थर्मल प्लांट

तलवंडी साबो पावर लिमिटेड की कुल क्षमता भी करीब 1,980 MW है। इसमें 495 MW की चार इकाइयां हैं।

कोयले की उपलब्धता प्रभावित होने से दोनों संयंत्रों की उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

51 थर्मल प्लांट गंभीर स्टॉक स्थिति में होने का दावा

बिजली मंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर कोयले के स्टॉक की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि 51 थर्मल पावर प्लांटों को ‘क्रिटिकली स्टॉक्ड’ श्रेणी में रखा गया है। उनके अनुसार इन संयंत्रों में उपलब्ध कोयला सामान्य आवश्यकता के मुकाबले करीब 47.8 प्रतिशत के स्तर पर है।

हालांकि, बिजली आपूर्ति की स्थिति लगातार बदल सकती है। कोयले की सप्लाई, बिजली की मांग और उत्पादन में बदलाव के आधार पर कटौती की स्थिति भी बदल सकती है।

केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने केंद्र सरकार से कोयले की आपूर्ति में सुधार के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि समस्या का जल्द समाधान जरूरी है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जा सके।

फिलहाल पंजाब में बिजली व्यवस्था पर कोयले की उपलब्धता और आने वाले दिनों की मांग का सीधा असर रहेगा। यदि थर्मल प्लांटों को पर्याप्त ईंधन नहीं मिला तो बिजली आपूर्ति पर दबाव और बढ़ने की संभावना है।

 

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