पंजाब सरकार का दावा: सर्वे में AAP को 69 से 82 सीटें, भगवंत मान मुख्यमंत्री पद की पहली पसंद
सरकार ने विकास कार्यों, मुफ्त बिजली, राशन और जनहितैषी योजनाओं को बताया समर्थन की वजह
पंजाब सरकार ने एक सर्वे का हवाला देते हुए दावा किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) एक बार फिर बहुमत हासिल कर सकती है। सरकार के मुताबिक, निजी एजेंसी स्कोर इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पार्टी को 117 सदस्यीय विधानसभा में 69 से 82 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।
हालांकि, ये आंकड़े पंजाब सरकार की ओर से किए गए दावे पर आधारित हैं। सर्वे की विस्तृत कार्यप्रणाली और आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं पर भरोसे का दावा
पंजाब सरकार का कहना है कि राज्य में सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर यानी एंटी-इनकंबेंसी का खास असर नहीं दिख रहा है। सरकार ने दावा किया कि मावां-धीयां सत्कार योजना, मुफ्त बिजली और राशन जैसी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है।
सरकार के अनुसार, माझा, मालवा और दोआबा क्षेत्रों में इन योजनाओं और विकास कार्यों को लेकर लोगों का समर्थन दिखाई दे रहा है। दावे के मुताबिक, माझा और दोआबा में 60 प्रतिशत से अधिक लोगों ने सरकार के कामकाज की सराहना की है।
कानून-व्यवस्था और स्थानीय विकास पर भी संतुष्टि का दावा
सरकार की ओर से पेश किए गए सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कानून-व्यवस्था और स्थानीय विकास कार्यों को लेकर करीब 58 प्रतिशत लोगों ने संतुष्टि जताई है।
सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए कदमों और आम जनता को दी जा रही सुविधाओं का असर लोगों की राय में दिखाई दे रहा है। हालांकि, इन दावों का आकलन करने के लिए सर्वे से जुड़े विस्तृत आंकड़े और स्वतंत्र सत्यापन महत्वपूर्ण होंगे।
भगवंत मान मुख्यमंत्री पद के लिए पहली पसंद
पंजाब सरकार के दावे के अनुसार, सर्वे में करीब 39.36 प्रतिशत लोगों ने भगवंत मान को दोबारा मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली पसंद बताया है।
सरकार का मानना है कि विकास कार्यों, जनहितैषी योजनाओं और सरकारी सुविधाओं के आधार पर आम आदमी पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में फायदा मिल सकता है। सर्वे में पार्टी को 69 से 82 सीटें मिलने का अनुमान भी इसी दावे का हिस्सा है।
फिलहाल, इन आंकड़ों को पंजाब सरकार द्वारा प्रस्तुत सर्वे के निष्कर्षों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आगामी चुनाव में वास्तविक जनसमर्थन और सीटों की स्थिति का पता चुनाव परिणाम आने के बाद ही चलेगा।

