सजा के बाद सिमरजीत बैंस बोले- मैं राहुल गांधी का साथी हूं, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता रहूंगा
मानहानि मामले में एक साल की कैद के फैसले को पूर्व विधायक ने अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़ा, कहा- पटियाला सेशन कोर्ट और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपील करेंगे
लुधियाना के पूर्व विधायक और लोक इंसाफ पार्टी के प्रमुख सिमरजीत सिंह बैंस ने मानहानि मामले में एक साल की सजा सुनाए जाने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है। दशहरे के अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने फैसले को लोकतंत्र और बोलने की आजादी पर हमला बताया। बैंस ने कहा कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे और इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालतों का रुख करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैंस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि वह उनके साथी हैं। उन्होंने राहुल गांधी को मोदी सरनेम मामले में मिली सजा का उदाहरण देते हुए कहा कि सजा मिलने के बावजूद राहुल गांधी ने अपनी बात रखना बंद नहीं किया, इसलिए वह भी चुप नहीं बैठेंगे।
बोले- 25 साल के राजनीतिक करियर में 13 बार जेल गया
सिमरजीत सिंह बैंस ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए दावा किया कि वह अपने करीब 25 साल के राजनीतिक करियर में 13 बार जेल जा चुके हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने रेत माफिया, केबल माफिया और ड्रग माफिया के खिलाफ आवाज उठाई और इस दौरान लगभग पौने पांच साल जेल में बिताए।
बैंस ने कहा कि पहली बार वह 12 साल की उम्र में धर्म युद्ध मोर्चे के दौरान जेल गए थे। उन्होंने अपने राजनीतिक संघर्षों का हवाला देते हुए कहा कि जेल जाना उनके लिए नई बात नहीं है और वह आगे भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे।
2019 के स्टिंग का भी किया जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बैंस ने वर्ष 2019 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक जज से जुड़े कथित स्टिंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुखपाल खैहरा की जमानत रद्द कराने के लिए एक जज ने 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।
बैंस के अनुसार, उन्होंने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में ऑडियो सार्वजनिक किया था और विधानसभा में संबंधित जज के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया था। उन्होंने कहा कि वह न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन यदि कहीं भ्रष्टाचार होता है तो उसे सामने लाने की कोशिश करते रहेंगे। ये आरोप बैंस के बयान पर आधारित हैं।
फैसले के खिलाफ अदालत में अपील करेंगे
सिमरजीत सिंह बैंस ने कहा कि वह मानहानि मामले में आए फैसले को चुनौती देंगे। इसके लिए वह पटियाला सेशन कोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे।
उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से उनकी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश नहीं रुकेगी। बैंस ने यह भी कहा कि वह न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन अपने खिलाफ आए फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देना उनका अधिकार है।
क्या है ब्रह्म मोहिंद्रा से जुड़ा मानहानि मामला?
यह मामला वर्ष 2018 में पंजाब के स्वास्थ्य विभाग में दवाइयों की खरीद और नशा मुक्ति केंद्रों को दवाओं की आपूर्ति में कथित अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है। उस समय विधायक रहे सिमरजीत सिंह बैंस ने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा पर गंभीर आरोप लगाए थे।
बैंस ने दावा किया था कि ब्रह्म मोहिंद्रा के फार्मा कंपनी ‘Arbour Biotech’ से कथित संबंध हैं और दवाइयों की खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। ब्रह्म मोहिंद्रा ने इन आरोपों को निराधार और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।
अदालत ने सुनाई एक साल की कैद
पटियाला की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एकता सहोता की अदालत ने मानहानि मामले में सिमरजीत सिंह बैंस को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 500 के तहत दोषी ठहराते हुए एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके और इससे शिकायतकर्ता की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
अब बैंस इस फैसले को ऊपरी अदालतों में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। अपील पर आगे क्या फैसला होता है, इस पर मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया के दौरान स्थिति स्पष्ट होगी।

