सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, नई कारों के बीमा नियम भी बदले
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के बिना चलने वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल न देने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया जाए।
इसके साथ ही कोर्ट ने नई गाड़ियों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि भी बढ़ाने का निर्देश दिया है।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का निर्देश?
जस्टिस संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि पेट्रोल पंपों को वाहन बीमा डेटाबेस से जोड़ने की योजना बनाई जाए।
यदि किसी वाहन का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वैध नहीं होगा, तो उसे पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। यह व्यवस्था पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की जाएगी।
क्यों उठाया गया यह कदम?
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश आंकड़ों के अनुसार, देश में चल रहे करीब 56% वाहन बिना वैध बीमा के हैं। ऐसे मामलों में सड़क दुर्घटना होने पर पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर मुआवजा मिलने में बड़ी मुश्किलें आती हैं।
पेट्रोल पंप पर कैसे होगी जांच?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत:
- पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे।
- कैमरे वाहन नंबर को VAHAN पोर्टल और Insurance Information Bureau (IIB) के डेटाबेस से मिलाकर बीमा की स्थिति जांचेंगे।
- बीमा समाप्त होने पर वाहन को ईंधन देने से रोका जा सकता है।
इस परियोजना पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, IRDAI और पेट्रोलियम मंत्रालय मिलकर काम करेंगे।
नई कार और बाइक के बीमा नियम
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नई गाड़ियों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा अवधि बढ़ाई गई है।
- नई कार: 3 वर्ष की जगह अब 4 वर्ष का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य।
- नई बाइक/स्कूटर: 5 वर्ष की जगह अब 6 वर्ष का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य।
पुलिस भी तुरंत कर सकेगी जांच
कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया है कि पुलिस को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल ऐप उपलब्ध कराए जाएं, जो VAHAN और IIB डेटाबेस से जुड़े हों। इससे मौके पर ही वाहन का बीमा स्टेटस जांचकर ई-चालान जारी किया जा सकेगा।
टोल प्लाजा पर भी नई व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने चुनिंदा राष्ट्रीय राजमार्गों पर ANPR आधारित ऑटोमैटिक टोल सिस्टम लागू करने का भी सुझाव दिया है, ताकि वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना न पड़े और लंबी कतारों से राहत मिल सके।
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस क्यों जरूरी है?
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत भारत में हर वाहन के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है। यदि किसी वाहन से किसी अन्य व्यक्ति, उसके वाहन या संपत्ति को नुकसान होता है, तो इसी बीमा के माध्यम से मुआवजा दिया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि बीमा कवरेज बढ़ने से सड़क दुर्घटना पीड़ितों को न्याय और आर्थिक सहायता समय पर मिल सकेगी।