अमृतसर: श्री गुरु राम दास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 1 नवंबर 2026 से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजीयात्रा सुविधा का लाइव ट्रायल शुरू होने जा रहा है। इसके तहत ई-चिप युक्त पासपोर्ट रखने वाले भारतीय नागरिक चेहरे की पहचान यानी फेस स्कैन के जरिए एयरपोर्ट टर्मिनल में प्रवेश कर सकेंगे। इससे यात्रियों को बार-बार दस्तावेज दिखाने की जरूरत कम होगी और प्रवेश प्रक्रिया में लगने वाला समय भी बचेगा।
फेस स्कैन के जरिए टर्मिनल में मिलेगा प्रवेश
इस सुविधा को शुरू करने के लिए एयरपोर्ट परिसर में फेस स्कैनर मशीनें पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं। इन मशीनों के जरिए यात्रियों के चेहरे की पहचान कर उनकी एंट्री प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
एयरपोर्ट प्रशासन ने बताया है कि सुविधा शुरू करने से जुड़ी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसके लिए तत्परता परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अब 1 नवंबर से लाइव ट्रायल के दौरान तकनीक की वास्तविक परिस्थितियों में जांच की जाएगी।
बार-बार दस्तावेज दिखाने की जरूरत होगी कम
डिजीयात्रा सुविधा के तहत यात्रियों की पहचान चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक से की जाएगी। इससे टर्मिनल में प्रवेश के दौरान दस्तावेजों की बार-बार जांच की आवश्यकता कम हो सकती है।
इस तकनीक का उद्देश्य एयरपोर्ट पर प्रवेश प्रक्रिया को अधिक तेज, सहज और सुविधाजनक बनाना है, ताकि यात्रियों को लंबी प्रक्रिया से राहत मिल सके।
शुरुआती चरण में किन यात्रियों को मिलेगा लाभ?
लाइव ट्रायल के शुरुआती चरण में यह सुविधा सभी यात्रियों के लिए उपलब्ध नहीं होगी। फिलहाल इसका लाभ केवल ई-चिप युक्त पासपोर्ट रखने वाले भारतीय नागरिकों को मिलेगा, जो अमृतसर एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़ने जा रहे होंगे।
इस सुविधा से जुड़ी प्रमुख बातें:
- अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान करने वाले यात्री: ई-चिप पासपोर्ट धारक भारतीय नागरिक फेस स्कैन से टर्मिनल में प्रवेश कर सकेंगे।
- विदेश से आने वाले यात्री: फिलहाल आगमन करने वाले यात्रियों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा।
- घरेलू यात्री: घरेलू उड़ानों से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए इस ट्रायल के दौरान कोई बदलाव नहीं किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए प्रवेश प्रक्रिया होगी आसान
अमृतसर एयरपोर्ट पर डिजीयात्रा के लाइव ट्रायल की शुरुआत को हवाई यात्रा की प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ट्रायल के दौरान यह देखा जाएगा कि फेस रिकग्निशन तकनीक वास्तविक परिस्थितियों में कितनी प्रभावी तरीके से काम करती है और यात्रियों को इससे कितना लाभ मिलता है।

