पंजाब के महाराजा अज सरोवर के विकास को केंद्र की मंजूरी, ₹93.94 करोड़ होंगे खर्च
खरड़: पंजाब के खरड़ में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले महाराजा अज सरोवर के विकास का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने सरोवर के कायाकल्प और पुनर्विकास के लिए 93.94 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इस फैसले को करीब 40 वर्षों से चल रहे संरक्षण और विकास के प्रयासों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद सरोवर को धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे खरड़ की पहचान को मजबूत करने और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की उम्मीद जताई जा रही है।
40 साल के प्रयासों के बाद मिली सफलता
श्री राम मंदिर अज सरोवर विकास कमेटी के पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार की मंजूरी पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के लंबे समय से चले आ रहे प्रयासों का परिणाम है।
कमेटी ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग के लिए पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्र सरकार का आभार जताया।
कैसे मिली प्रोजेक्ट को मंजूरी?
कमेटी के अनुसार, राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया 26 मार्च 2026 को श्री राम मंदिर में मूर्ति स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे। इस दौरान सरोवर के विकास के लिए आवश्यक प्रयास करने का भरोसा दिया गया था।
इसके बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देश पर पंजाब सरकार के अधिकारियों ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय को भेजी। कई चरणों की प्रक्रिया के बाद परियोजना को मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई है।
133 कनाल में फैला है ऐतिहासिक सरोवर
महाराजा अज सरोवर लगभग 133 कनाल क्षेत्र में फैला हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इसका संबंध भगवान श्रीराम के पूर्वज महाराजा अज से है। इस वजह से यह स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
कमेटी के सदस्यों के मुताबिक, ब्रिटिश काल में इस क्षेत्र से हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं से जुड़े पुरातात्विक अवशेष मिलने का भी उल्लेख मिलता है। इन ऐतिहासिक पहलुओं के कारण सरोवर के संरक्षण को विशेष महत्व दिया जाता रहा है।
1986 से चल रहे हैं संरक्षण के प्रयास
सरोवर के संरक्षण और विकास के लिए वर्ष 1986 में स्थानीय लोगों को साथ लेकर अभियान शुरू किया गया था। कमेटी के अनुसार, लोगों के सहयोग से सरोवर के घाटों का जीर्णोद्धार किया गया और श्री राम भवन का निर्माण कराया गया। बाद में भगवान श्रीराम और उनके पूर्वजों को समर्पित मंदिर भी बनाया गया।
अब 93.94 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद सरोवर के व्यापक विकास की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि, परियोजना के तहत होने वाले कार्यों, निर्माण की समयसीमा और पर्यटन सुविधाओं के विस्तृत स्वरूप की जानकारी आधिकारिक परियोजना दस्तावेजों से स्पष्ट होगी।

