Operation Blue Star Victims: हाईकोर्ट से 133 प्रभावित दुकानदारों को बड़ी राहत, ₹38,400 की जगह ₹1,000 प्रति गज के पुराने रेट पर जमीन का रास्ता साफ

Operation Blue Star Victims: 133 प्रभावित दुकानदारों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत

चंडीगढ़: ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान अमृतसर में अपना कारोबार और दुकानें गंवाने वाले 133 प्रभावित दुकानदारों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। करीब चार दशक से अधिक समय से पुनर्वास और वैकल्पिक जमीन के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे प्रभावितों के मामले में अदालत ने पंजाब सरकार को पुराने निर्धारित रेट के आधार पर मालमंडी में वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रभावित लोगों के लिए ₹1,000 प्रति गज के पुराने निर्धारित रेट पर जमीन मिलने का रास्ता खुल गया है। वहीं, बाद में तय किए गए ₹38,400 प्रति गज के रेट को लेकर प्रभावितों को राहत मिली है।

42 साल से चल रही थी कानूनी लड़ाई

ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान अमृतसर में कई दुकानदारों और व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हुआ था। दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान उजड़ने के बाद प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास और वैकल्पिक जमीन की मांग उठाई।

मालमंडी में वैकल्पिक जगह देने का मामला लंबे समय तक सरकारी विभागों और अदालतों में चलता रहा। कई दशक बीतने के बावजूद मामला पूरी तरह हल नहीं हो पाया और प्रभावित परिवार अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखते रहे।

जमीन के रेट में लगातार बढ़ोतरी बनी परेशानी

मामले की सुनवाई के दौरान जमीन की कीमत में समय के साथ हुई बढ़ोतरी प्रमुख मुद्दा रही। प्रभावित पक्ष के अनुसार, लंबे समय से लंबित पुनर्वास के मामले में जमीन की कीमत लगातार बढ़ती गई, जिससे उनके सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई।

बताया गया कि वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रभावितों के लिए ₹10,000 प्रति गज के आधार पर राशि जमा कराने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट में वापस आया।

जनवरी 2020 में जमीन आवंटन के लिए ₹14,450 प्रति गज का आधार तय किए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ।

2022 में रेट बढ़कर ₹38,400 प्रति गज हुआ

जुलाई 2022 में पंजाब सरकार ने जमीन का रेट बढ़ाकर ₹38,400 प्रति गज कर दिया। इससे 133 प्रभावित दुकानदारों के लिए वैकल्पिक जमीन हासिल करना बेहद मुश्किल हो गया।

प्रभावितों का कहना था कि वे पहले ही दशकों से विस्थापन और कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अचानक कई गुना बढ़े रेट पर जमीन खरीदना उनके लिए व्यावहारिक नहीं था।

इसी मुद्दे को लेकर प्रभावित दुकानदारों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट ने पुराने रेट पर दिया जोर

सुनवाई के दौरान प्रभावित पक्ष की ओर से अधिवक्ता सौरव खुराना और अन्य वकीलों ने अदालत के सामने दलील रखी कि करीब 42 वर्षों से पुनर्वास का इंतजार कर रहे लोगों पर मौजूदा बढ़ी हुई जमीन की कीमत का बोझ डालना उचित नहीं होगा।

दलील में प्रभावित परिवारों की लंबी कानूनी लड़ाई और उनके पुनर्वास के अधिकार का मुद्दा उठाया गया। अदालत ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए पुराने निर्धारित आधार पर वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने का रास्ता साफ किया।

₹38,400 के रेट से मिली राहत

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब पंजाब सरकार को प्रभावित दुकानदारों को पुराने ₹1,000 प्रति गज के निर्धारित रेट के आधार पर मालमंडी में वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।

इससे उन 133 प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो वर्षों से अपने पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं।

दशकों बाद पुनर्वास की उम्मीद

यह मामला केवल जमीन के रेट तक सीमित नहीं है, बल्कि उन परिवारों के लंबे इंतजार से भी जुड़ा है, जो 1984 की घटनाओं के बाद से अपने कारोबार और संपत्ति से जुड़े अधिकारों के लिए कानूनी रास्ते पर रहे हैं।

हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद प्रभावित दुकानदारों के लिए मालमंडी में वैकल्पिक जगह मिलने की उम्मीद फिर मजबूत हुई है। अब आगे की प्रक्रिया में सरकार की ओर से अदालत के निर्देशों के अनुरूप कदम उठाना अहम होगा।

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